20 साल पुराने अपहरण केस में अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव बरी, लखनऊ CBI कोर्ट से मिली बड़ी राहत

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Babloo Srivastava News: लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन ओम प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव को करीब 20 साल पुराने अपहरण मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने 6 नवंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष बबलू श्रीवास्तव के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। इसी वजह से उसे इस मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, इस फैसले से बबलू श्रीवास्तव को एक मामले में राहत जरूर मिली है, लेकिन वह अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। इसकी वजह दूसरे आपराधिक मामले में मिली उम्रकैद की सजा है।

क्या है 20 साल पुराना अपहरण मामला?

यह मामला पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित होटल लिंगटन (Linton) के मालिक के अपहरण की साजिश से जुड़ा है। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही थी। सीबीआई का आरोप था कि जब अपहरण की घटना हुई, उस समय बबलू श्रीवास्तव प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद था। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने जेल में रहते हुए ही अपहरण की योजना बनाई थी। आरोप था कि वह जेल के अंदर से अपने गैंग के लोगों के संपर्क में रहता था और उनके जरिए इस साजिश को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था।

कोर्ट में क्या हुआ और बबलू श्रीवास्तव कैसे हुआ बरी?

लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत में इस मामले की लंबे समय तक सुनवाई चली। दोनों पक्षों ने कोर्ट में अपनी-अपनी दलीलें रखीं। बबलू श्रीवास्तव की ओर से वकील जीशान अल्वी और वीर सिंह ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कहा कि सीबीआई के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि बबलू ने नैनी जेल में रहते हुए फोन या किसी दूसरे माध्यम से कोलकाता के होटल मालिक के अपहरण की योजना बनाई थी। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि केवल शक के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। चूंकि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए जरूरी सबूत पेश नहीं कर पाया, इसलिए अदालत ने बबलू श्रीवास्तव को इस मामले में बरी कर दिया।

पूर्व IPS अधिकारी की किताब में भी हुआ था मामले का जिक्र

यह अपहरण मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था। उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने भी अपनी किताब में इस घटना का जिक्र किया था।उन्होंने अपनी किताब में जेल के अंदर से गैंग चलाने और अपराध की योजनाएं बनाने से जुड़े तरीकों के बारे में भी बताया था।

बरी होने के बाद भी जेल से बाहर क्यों नहीं आएगा बबलू श्रीवास्तव?

20 साल पुराने अपहरण मामले में बरी होने के बावजूद बबलू श्रीवास्तव की जेल से रिहाई आसान नहीं है। इसकी दो बड़ी वजह हैं।

1. कस्टम अधिकारी एलडी अरोड़ा हत्याकांड में उम्रकैद

बबलू श्रीवास्तव प्रयागराज में 24 मार्च 1993 को हुए एडिशनल कस्टम कलेक्टर एलडी अरोड़ा की हत्या के मामले में दोषी है। इस मामले में टाडा (TADA) कोर्ट ने साल 2008 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था। इसी सजा के कारण वह लंबे समय से जेल में बंद है।

2. समय से पहले रिहाई और दया याचिका खारिज

बबलू श्रीवास्तव ने समय से पहले जेल से रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने उसकी गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि और TADA कानून के तहत मिली सजा का हवाला देते हुए रिहाई का विरोध किया था। इसके बाद राज्यपाल ने भी उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी। इस कारण उसे फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिल सकी है।

बरेली सेंट्रल जेल में बंद है बबलू श्रीवास्तव

अपहरण की दुनिया में ‘किडनैपिंग किंग ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर बबलू श्रीवास्तव फिलहाल उत्तर प्रदेश की बरेली सेंट्रल जेल में बंद है। वहां उसे कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। लखनऊ की सीबीआई अदालत के फैसले से उसे 20 साल पुराने अपहरण मामले में बड़ी राहत मिली है। लेकिन दूसरे मामले में उम्रकैद की सजा और दया याचिका खारिज होने के कारण उसकी जेल से रिहाई फिलहाल मुश्किल दिखाई दे रही है।

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