Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर, AQI 400 के पार; जहरीली हवा से स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा

Delhi Air Pollution

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Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। राजधानी की हवा पहले से ही खराब है और आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 369 से 373 के बीच दर्ज किया गया है, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, दिल्ली के 20 से ज्यादा इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी माना जाता है। मौसम विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की धीमी गति और स्मॉग के कारण प्रदूषण आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।

Delhi Air Pollution: दिल्ली के 20 से ज्यादा इलाकों में प्रदूषण का गंभीर स्तर

दिल्ली के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है। पंजाबी बाग में AQI 452-464, जहांगीरपुरी में 450-459, रोहिणी में 435-473, आईआईटी दिल्ली में 444-453 और मुंडका में 440-443 दर्ज किया गया है। वहीं, विवेक विहार और आर.के. पुरम में भी AQI 430 के पार पहुंच गया है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा बवाना, पटपड़गंज, ओखला फेज-2, नरेला और आईटीओ जैसे इलाकों में भी AQI 400 के पार दर्ज किया गया है। दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी प्रदूषण का असर देखने को मिल रहा है। इन शहरों में धुंध की मोटी परत छाई हुई है, जिससे लोगों को दूर तक देखने में भी परेशानी हो रही है।

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के तीन बड़े कारण

1. मौसम में बदलाव और हवा की धीमी गति: सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली-NCR में तापमान कम होने लगा है। इस दौरान हवा की गति भी धीमी हो जाती है और वातावरण में नमी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में प्रदूषण के कण हवा के साथ ऊपर नहीं जा पाते और जमीन के आसपास जमा हो जाते हैं। इससे धुंध और स्मॉग बढ़ने लगता है।

2. वाहनों से निकलने वाला धुआं और सड़क की धूल: दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी करीब 17.9 प्रतिशत है। इसके अलावा सड़कों पर उड़ने वाली धूल, खुले में कूड़ा जलाना और निर्माण कार्य भी हवा को प्रदूषित कर रहे हैं।

3. पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं का असर भी दिल्ली की हवा पर पड़ता है। पराली के धुएं से निकलने वाला प्रदूषण दिल्ली तक पहुंचता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी 15.6 प्रतिशत से ज्यादा बताई गई है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब सरकार पर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है।

प्रदूषण से शरीर के इन अंगों को हो सकता है नुकसान

जब AQI 400 के पार पहुंच जाता है, तो हवा में मौजूद छोटे प्रदूषण कण सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं। ये कण फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने के साथ सांस और एलर्जी से जुड़ी समस्याओं के मरीज भी बढ़ रहे हैं।

फेफड़े: प्रदूषण के छोटे कण फेफड़ों के अंदर तक पहुंचकर सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। इससे खांसी, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

दिल: प्रदूषण का असर दिल पर भी पड़ सकता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

दिमाग: प्रदूषित हवा के संपर्क में लंबे समय तक रहने से सिरदर्द और चक्कर आने जैसी परेशानी हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय में स्ट्रोक और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

आंखें और त्वचा: प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, पानी आना और खुजली हो सकती है। वहीं, त्वचा पर लाल निशान, रैशेज और एलर्जी की समस्या भी हो सकती है।

बच्चे और गर्भवती महिलाएं: प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ सकता है। बच्चों के फेफड़े अभी पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए प्रदूषित हवा उनके लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है। वहीं, गर्भवती महिलाओं में प्रदूषण के कारण समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ सकता है।

प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने उठाए ये कदम

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण यानी स्टेज-2 लागू किया गया है। इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य सड़कों और प्रदूषण वाले इलाकों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है। सड़कों की धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कई खुले कामों पर रोक लगाई गई है। पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी सख्ती की जा रही है। दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की जांच की जा रही है, ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को रोका जा सके।

दिल्लीवासी प्रदूषण से खुद को कैसे बचाएं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिल्लीवासियों को प्रदूषण से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। लोगों को सुबह और देर शाम टहलने, दौड़ने या बाहर व्यायाम करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय प्रदूषण का असर ज्यादा हो सकता है। अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या N99 मास्क पहनकर ही निकलें। इसके अलावा, सुबह और शाम घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। संभव हो तो घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और खाने में आंवला, अदरक, तुलसी और हरी सब्जियां शामिल करें।

अस्थमा और दिल के मरीजों को अपनी दवाइयां और इनहेलर हमेशा अपने पास रखने चाहिए। अगर सांस लेने में परेशानी हो, ज्यादा खांसी आए या तबीयत बिगड़ने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। दिल्ली-NCR में बढ़ता प्रदूषण अब सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक जरूरी बचाव के उपाय अपनाना ही बेहतर है।

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