Mayawati Mission 2027: मायावती ने तेज की चुनावी तैयारी, लखनऊ में 75 जिलों के पदाधिकारियों के साथ की बड़ी बैठक

Mayawati Mission 2027

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Mayawati Mission 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करना और पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करना था। राजनीतिक जानकार इस बैठक को बीएसपी के मिशन-2027 की बड़ी शुरुआत मान रहे हैं। पिछले कुछ चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए मायावती अब संगठन को फिर से मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश कर रही हैं।

Mayawati Mission 2027: बैठक में संगठन को मजबूत करने पर जोर

लखनऊ में सुबह 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में करीब 550 नेताओं और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें प्रदेश के वरिष्ठ नेता, जोनल प्रभारी, भाईचारा कमेटियों के प्रमुख और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल थे। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, आनंद कुमार और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल भी मौजूद रहे। मायावती ने सभी पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन की स्थिति की जानकारी ली और कामकाज की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करना जरूरी है।

बैठक में नवंबर के अंत तक ज्यादातर विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करने का लक्ष्य रखा गया। बताया जा रहा है कि पार्टी करीब 100 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नाम पहले ही तय कर चुकी है। इस महीने के अंत तक लगभग 200 उम्मीदवारों की सूची तैयार करने की योजना है। उम्मीदवारों के चयन में उनकी स्थानीय लोकप्रियता, संगठन के प्रति निष्ठा और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा जाएगा।

EVM पर मायावती ने उठाए सवाल, बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग

बैठक में चुनाव प्रक्रिया और ईवीएम का मुद्दा भी चर्चा में रहा। मायावती ने भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में पहले कमजोर वर्गों को डराकर उनके वोट प्रभावित किए जाते थे और अब ईवीएम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती के लिए आगामी चुनाव बैलट पेपर से कराने की मांग दोहराई। साथ ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को फर्जी चुनावी सर्वे और मीडिया में फैलने वाली भ्रामक खबरों से सावधान रहने की सलाह दी।

पुराने वोट बैंक को वापस पाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग पर भरोसा

बीएसपी के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। साल 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने वाली पार्टी का प्रदर्शन पिछले कुछ चुनावों में कमजोर रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को केवल एक सीट मिली थी, जबकि पार्टी का वोट शेयर 13 फीसदी से अधिक रहा था। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। ऐसे में मायावती एक बार फिर अपने पुराने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ और सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर काम करती नजर आ रही हैं। बैठक में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ समाज के दूसरे कमजोर वर्गों को भी पार्टी से जोड़ने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, पार्टी से दूर हो चुके पुराने नेताओं को वापस लाने और मजबूत जनाधार वाले चेहरों को संगठन में जिम्मेदारी देने पर भी चर्चा हुई।

6 दिसंबर को लखनऊ में बीएसपी की बड़ी रैली

मायावती की बैठक में 6 दिसंबर 2026 को होने वाले बड़े कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। डॉ. भीमराव आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर लखनऊ के गोमती तट स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम और विशाल रैली आयोजित की जाएगी। मायावती ने सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों से अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को इस कार्यक्रम में शामिल कराने की तैयारी करें। इस कार्यक्रम को पार्टी के लिए शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। उम्मीद है कि मायावती के साथ राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी रैली को संबोधित करेंगे। इसके जरिए बीएसपी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने समर्थकों और विरोधी दलों को मजबूत राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

2027 में भाजपा और सपा को चुनौती देने की तैयारी

लखनऊ में हुई इस बैठक से मायावती ने साफ कर दिया है कि बीएसपी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई हुई ताकत वापस पाने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। पार्टी ने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, उम्मीदवारों का चयन जल्द पूरा करने और पुराने नेताओं को दोबारा जोड़ने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। हालांकि, बीएसपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी चुनावी रणनीति को जमीनी समर्थन और वोटों में बदलने की होगी। अब देखना होगा कि मायावती की ये तैयारियां 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए कितनी सफल साबित होती हैं।

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