शरद पवार को पीएम मोदी का फोन, सुप्रिया सुले को लेकर कही बड़ी बात; महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

PM Modi Sharad Pawar Phone Call

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PM Modi Sharad Pawar Phone Call: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के प्रमुख शरद पवार को फोन करके उनकी सेहत का हाल जाना। इस बातचीत के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दरअसल, 85 वर्षीय शरद पवार को सीने में दर्द और खांसी की शिकायत के चलते पुणे के रूबी हॉल क्लीनिक में भर्ती कराया गया था। बुधवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे बातचीत की और जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इस दौरान हुई बातचीत में सुप्रिया सुले का जिक्र आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

PM Modi Sharad Pawar Phone Call: ‘सुप्रिया अब तैयार हैं, आप आराम करें’

शरद पवार के करीबी सहयोगी और पारिवारिक मित्र विट्ठल मनियार ने पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री और शरद पवार के बीच हुई फोन पर चर्चा के बारे में जानकारी दी। मनियार के मुताबिक, बुधवार सुबह पीएम मोदी ने शरद पवार को फोन किया और उनकी तबीयत के बारे में पूछा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आराम करने की अपील करते हुए कहा, “साहब, आप पूरी तरह आराम करें। सुप्रिया अब तैयार हैं। सुप्रिया और हम सब मिलकर देश संभाल लेंगे। आप आराम करें, मेरी यही विनती है।”

बताया गया कि प्रधानमंत्री की इस बात पर शरद पवार ने भी सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने पीएम मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि वह आराम कर रहे हैं और जब सभी लोग अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, तो उन्हें देश की चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपना काम जारी रखने की बात भी कही। हालांकि, इस बातचीत को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय या शरद पवार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। फिलहाल यह जानकारी विट्ठल मनियार के बयान के आधार पर सामने आई है।

महाराष्ट्र की राजनीति में क्यों बढ़ीं चर्चाएं?

प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार के बीच हुई इस बातचीत को सामान्य शिष्टाचार कॉल माना जा रहा है। लेकिन बातचीत में सुप्रिया सुले का नाम आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार इस बातचीत को तीन संभावित घटनाक्रमों से जोड़कर देख रहे हैं।

1. क्या फिर एक होंगे NCP के दोनों गुट?

महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के दोबारा एक होने को लेकर हो रही है। एक तरफ अजित पवार का गुट है, जबकि दूसरी तरफ शरद पवार के नेतृत्व वाला NCP-SP गुट है। अगर दोनों गुट फिर से एक साथ आते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे पार्टी की राजनीतिक ताकत भी बढ़ सकती है। हालांकि, एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे फिलहाल दोनों गुटों के विलय की संभावना से इनकार कर चुके हैं।

2. क्या शरद पवार गुट NDA के करीब आएगा?

दूसरी चर्चा शरद पवार गुट के भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ आने को लेकर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एनसीपी के दोनों गुटों के बीच दोबारा समझौता होता है, तो इससे शरद पवार गुट और भाजपा के बीच राजनीतिक नजदीकियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, अभी तक इस तरह के किसी राजनीतिक फैसले की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

3. क्या सुप्रिया सुले को मिलेगी मोदी कैबिनेट में जगह?

इस पूरे मामले में सुप्रिया सुले का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वह बारामती से सांसद हैं और शरद पवार की बेटी हैं। प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत में उनका जिक्र होने के बाद उनके केंद्र सरकार में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में सुप्रिया सुले को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, इस बारे में न तो सरकार की ओर से कोई संकेत दिया गया है और न ही सुप्रिया सुले की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है।

शरद पवार और पीएम मोदी के रिश्तों पर भी चर्चा

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और उनके परिवार का हमेशा से महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शरद पवार के बीच राजनीतिक विचारधारा अलग होने के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर सम्मान और बातचीत का रिश्ता रहा है। पीएम मोदी का शरद पवार की तबीयत पूछने के लिए फोन करना इसी राजनीतिक शिष्टाचार का उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि, इस बातचीत में सुप्रिया सुले का जिक्र होने के बाद राजनीतिक चर्चाओं को नया विषय मिल गया है। फिलहाल NCP के दोनों गुटों के विलय, शरद पवार गुट के NDA में शामिल होने और सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलने जैसी बातें केवल राजनीतिक अटकलें हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बातचीत का महाराष्ट्र की राजनीति पर कोई असर पड़ता है या यह सिर्फ एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बनकर रह जाती है।

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