मोदी मंत्रिमंडल से हटाये गये मंत्रियों के विषय में जानकारी का कयास

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

बिहार —–

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना:मोदी मंत्रिमंडल के सबसे बड़े विस्तार से कुछ देर पहले नामचीन मंत्रियों का इस्तीफा सबसे चौंकाने वाली बात थी। मंत्रिमंडल विस्तार में ज्यादातर नौजवान चेहरों को शामिल किया गया है। साफ संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काम को तरजीह देंगे। इस मंत्रीमंडल विस्तार में प्रशासनिक सेवा,विधि सेवा, तकनीकी सेवा, चिकित्सा सेवा सहित अन्य विधाओं में एक्सपर्ट व्यक्तियों को मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिला है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यशैली के जानकार बताते हैं कि वे अनवरत काम करने में विश्वास रखते हैं और चाहते हैं कि मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगी भी उनकी कसौटी पर खरे उतरें।केवल काम का ढिंढोरा पीटने और बढ़-चढ़कर बोलने से उनके समक्ष इसका कोई असर नहीं पड़ता है। इसलिए वे समय-समय पर एक-एक मंत्रियों के काम की समीक्षा बड़ी गहराई के साथ करते रहते हैं। कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाले मंत्रियों की छुट्टी समय आने पर करने में उन्हें देर नहीं लगती।
अभी जिन मंत्रियों को हटाया गया है उनके संबंध में चर्चा करने का समय आ गया है। यद्यपि यह मात्र कयास लगाया जा रहा है। इसकी कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली है।कुल 12 मंत्रियों को इस मंत्रीमंडल विस्तार से पहले हटाया गया है जिनके नाम इस प्रकार हैं:-डी.वी.सदानन्द गौड़ा,रवि शंकर प्रसाद,थावर चंद गहलोत,रमेश पोखरियाल निशंक,प्रकाश जावड़ेकर, संतोष कुमार गंगवार, डॉक्टर हर्षवर्धन,बाबुल सुप्रियो, धोत्रे संजय शामराव,रतन लाल कटारिया,प्रताप चंद सारंगी और देबाश्री चौधरी।
मंत्रियों से इस्तीफा लेने के पीछे दो बड़े कारण दिखाई देते हैं।एक व्यवहारिक राजनीतिक मजबूरियां और दूसरा कोविड-19 महामारी के बाद जनता को सरकार का कामकाज दिखाई देने की आवश्यकता। इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं जिसपर विस्तार से चर्चा करने की आवश्यकता है। यह सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री के मन में क्या चल रहा है,वे क्या करनेवाले हैं इसकी भनक तक किसी को नहीं लगती। अभी तक के अपने कार्य काल में वे हमेशा सरप्राइज देते आये हैं और इस बार भी उन्होंने ऐसा ही किया है।
बात करते हैं रवि शंकर प्रसाद की। कानून के अच्छे जानकार,वाक्पटु, सरकार और उसकी नीतियों को दमदार ढंग से रखने में माहिर। फिर भी उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कयास लगाया जा रहा है कि ट्विटर विवाद उन पर भारी पड़ गया। इस विवाद को उन्होंने काफी आगे बढ़ाया जिससे अमेरिका ने भी अपनी नाखुशी जाहिर कर दी। देश हित में प्रधानमंत्री को कभी कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। दूसरा कारण मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा में प्रधानमंत्री के कसौटी पर खरा नहीं उतरना ।समझा जाता है कि इन्हीं कारणों से उन्हें सरकार से जाना पड़ा।
केन्द्र सरकार इस बात को लेकर सजग है कि यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज की आलोचना चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केन्द्र सरकार योगी आदित्यनाथ की किसी प्रकार की आलोचना से बचना चाहती है। इसी परिप्रेक्ष्य में संतोष गंगवार को मंत्री पद से इस्तीफा को जोड़कर देखा जा सकता है। पिछले दिनों संतोष गंगवार ने योगी आदित्यनाथ के नाम एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उनके कामकाज की उन्होंने आलोचना की थी। शायद यही वजह उन्हें मंत्री पद से हटाने की हो सकती है। दूसरी वजह प्रवासी मजदूरों की समस्या भी हो सकती है जिससे श्रम मंत्री के रुप में संतोष गंगवार सही तरीके से नहीं निपट सके।
बाबूल सुप्रियो को पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के वजह से मंत्री पद गंवाना पड़ा है। पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए भी उन्हें जिम्मेवार माना जा रहा है। इसके साथ उनका व्यवहार भी उनके आड़े हाथों आ गया।
प्रकाश जावड़ेकर भी प्रधानमंत्री के कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में 2020 के बाद से कोई काम हुआ हो ऐसा नहीं लगता है। इनका काम भी प्रधानमंत्री के कसौटी पर खरा नहीं उतरा जिसके कारण इन्हें मंत्रालय से जाना पड़ा।
रमेश पोखरियाल निशंक भी नई शिक्षा नीति लागू करने के पचड़े में फंस गये। नई शिक्षा नीति पूरी तरह फेल साबित हुई। यहां तक की 10 वीं और 12 वीं की परीक्षाएं सरकार को रोकनी पड़ी। प्रधानमंत्री इनके कामकाज से खुश नहीं थे जिस कारण इन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा।
डॉक्टर हर्षवर्धन के कामकाज की समीक्षा में प्रधानमंत्री के कसौटी पर वे खरे नहीं उतरे। स्वास्थ्य मंत्रालय का काम कोविड-19 महामारी के कारण बहुत महत्वपूर्ण हो गया था।इसे संभालने का कार्य जिस तत्परता से होनी चाहिए थी उसमें स्वास्थ्य मंत्री पिछड़ गये और उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा।
इसी प्रकार प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की गहन समीक्षा की थी। इसमें जिनका कामकाज तय मानक के अनुरूप नहीं पाया गया उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा।
अब एक नई टीम के साथ पूरी तन्मयता और पूरे जोश-खरोश के साथ सरकार का कामकाज होने जा रहा है जिससे जनता महसूस करेगी की काम हो रहा है।