बिहार की राजनीति में ओछेपन को मिला स्थान आरोप-प्रत्यारोप की ओछी शुरुआत

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

बिहार —

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

बिहार:देश की आजादी के लिए कुर्बान होने, यातनाएं सहने,जेल जाने, संपूर्ण स्वराज की लड़ाई लड़ने, मोहनदास करमचंद गांधी को बापू का दर्जा दिलाने में अग्रणी बिहार को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। एक-से-बढ़कर एक महापुरुषों का जन्म बिहार की धरती पर हुआ है।

राजनीति में सुचिता के लिए तबके बिहार के नेताओं का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी भी बड़े संयमित शब्दों में एक दसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते थे। अलग-अलग पार्टियों के नेता एक दूसरे के साथ बड़े प्यार से मिलते थे।

लेकिन कहते हैं कि जब देश में अच्छे विचार रखनेवालों की कमी हो, राजनीति में चाटुकारिता, चापलूसी का बोलबाला हो, पार्टी के मुखिया के करीब आना हो,अपना चेहरा चमकाना हो तो नेताओं को ओछी राजनीति करने से भी गुरेज नहीं होता है।

अभी बिहार में कोरोना का टीका लेने और नहीं लेने को लेकर एकदम से निम्न श्रेणी की राजनीति,ओछी राजनीति की शुरुआत हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का कहना था कि जबतक 70% आबादी का वैक्सिनेशन नहीं हो जाता तबतक वे वैक्सीन नहीं लगायेंगे। अब जदयू की ओर से प्रतिक्रिया तो आनी ही थी। जदयू नेता नीरज कुमार ने दावा किया कि पूरा लालू परिवार टीका लेने के खिलाफ है। अब इसमें सच्चाई की बात तो उन्हीं नेताओं को पता होगा। लेकिन टीकाकरण के आड़ में सियासत का पहिया मर्दानगी,यौन क्षमता और नपुंसकता के ईर्द-गिर्द घूमने लगी है।

सतापक्ष द्वारा यह कहा जाने लगा कि तेजस्वी यादव उस अफवाह के शिकार हो गये हैं जिसमें यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि टीका लगवाने से मर्दानगी,यौन क्षमता में कमी और नपुंसकता हो जा रही है। भाजपा प्रवक्ता डॉ रामसागर सिंह ने तेजस्वी यादव से अपील करते हुए आग्रह किया कि देश दुनिया के वैज्ञानिकों का विश्वास कीजिए और टीका लगवाइये। इससे मर्दानगी नहीं जाती और यौन क्षमता में कोई कमी नहीं आती।

इसपर पलटवार करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि बीजेपी किस स्तर तक गिर सकती है इसे सहज समझा जा सकता है। बीजेपी के अपशब्दों को उन्होंने आशीर्वाद के रुप में ग्रहण करने की बात बताकर गेंद बीजेपी के पाले में डाल दिया है।

यह आज की ओछी राजनीति को दर्शाता है। राजनेताओं को इससे परहेज करना चाहिए। नैतिकता को गिरने नहीं देना चाहिए। पक्ष विपक्ष का काम है एक दूसरे पर सार्थक, सुचिता पूर्ण आरोप लगाना। लोकतंत्र में इसके लिए स्थान है। परन्तु सभी को ध्यान रखना चाहिए कि आरोप में निम्न स्तर की भाषा का प्रयोग नहीं हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *