Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चंदा गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अदालत ने सभी याचिकाओं का किया निपटारा

Ram Mandir Donation Scam

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Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए चंदे और कीमती सामान की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी जनहित याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और निचली अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई बंद कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की पीठ ने कहा कि जब मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो अब आगे की सुनवाई अयोध्या की स्थानीय अदालत में होगी। वहीं की अदालत इस मामले में गवाहों के बयान सुनेगी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार फैसला करेगी।

राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने इस मामले में किसी भी आरोपी को दोषी या निर्दोष नहीं माना है। अदालत ने कहा कि उसका मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि मामले की जांच सही तरीके से और समय पर पूरी हो। कोर्ट ने माना कि यह मामला आम लोगों और श्रद्धालुओं से जुड़ा है, इसलिए इसमें जनहित भी शामिल है। इसी वजह से अदालत ने याचिकाओं को खारिज करने के बजाय उनका निपटारा किया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी कि वे अयोध्या की स्थानीय अदालत में चल रहे मुकदमे में कानून के अनुसार पीड़ित पक्ष की तरह अपनी बात रख सकते हैं और अदालत की मदद कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी निर्देश दिया कि वे कानून के मुताबिक मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएं। सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका भी सामने आई थी। इसमें मांग की गई थी कि जांच होनी चाहिए कि मौजूदा राम मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिस पर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद में फैसला सुनाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस नई मांग पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

SIT की जांच में सामने आईं चोरी की 105 घटनाएं

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इस मामले की जांच विस्तार से की गई है। लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यों वाली SIT बनाई गई थी। टीम ने जांच के दौरान CCTV फुटेज और दूसरे डिजिटल सबूतों की मदद ली। SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज में चढ़ावे के पैसों की गिनती के दौरान चोरी की 105 घटनाएं सामने आईं। आरोप है कि कुछ कर्मचारी दान पेटियों यानी हुंडियों में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए पैसे और कीमती सामान की गिनती करते समय उन्हें अपनी जेब में रख लेते थे।

जांच में यह भी पता चला कि चोरी किए गए पैसों को कुछ आरोपियों ने बैंक खातों में जमा कराया, जबकि कुछ ने जमीन और दूसरी संपत्तियां खरीदने में इस्तेमाल किया। जांच के दौरान संपत्ति खरीदने में भी गड़बड़ी सामने आई। कुछ मामलों में ऐसी संपत्तियों की रजिस्ट्री सिर्फ 15 लाख रुपये में दिखाई गई, जबकि उनकी असली कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा थी। आरोप है कि बाकी रकम का भुगतान चोरी किए गए पैसों से नकद किया गया था।

जून 2026 में सामने आया था मामला, 8 लोग गिरफ्तार

राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में गड़बड़ी का यह मामला जून 2026 में सामने आया था। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत और विपक्ष की ओर से मामला उठाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को जांच के लिए SIT बनाई थी। इसके बाद 25 जून 2026 को पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की। पुलिस ने दान की रकम में हेराफेरी और विश्वासघात के आरोप में कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। ये सभी कर्मचारी मुख्य रूप से नोटों की गिनती और नकदी संभालने का काम करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से लाखों रुपये की नकदी, कार और महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान भी बरामद किए थे। जांच में जुटाए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

CBI जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग, अब अयोध्या कोर्ट में होगी सुनवाई

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि जांच राज्य की SIT के बजाय CBI से कराई जाए। इसके अलावा मंदिर के खातों की विशेष फॉरेंसिक जांच कराने की भी मांग की गई थी, ताकि चंदे और दान की रकम का पूरा हिसाब सामने आ सके। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने SIT की जांच और समय पर चार्जशीट दाखिल किए जाने पर संतोष जताया। अदालत को बताया गया कि जांच टीम ने आरोपियों के खिलाफ जरूरी डिजिटल सबूत भी जुटाए हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई खत्म हो चुकी है। आगे की कानूनी प्रक्रिया अयोध्या की स्थानीय अदालत में चलेगी। वहां गवाहों के बयान दर्ज होंगे और दोनों पक्षों के वकील अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे। इसके बाद अदालत सबूतों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाएगी। फिलहाल, इस मामले में सभी आरोपियों को दोषी ठहराने का फैसला नहीं हुआ है। अब सबकी नजर अयोध्या कोर्ट में होने वाली सुनवाई और उसके अंतिम फैसले पर रहेगी।

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