बिहार—
पटना: बिहार पृथ्वी दिवस की शुरुआत वर्ष 2011 में इसी दिन किया गया था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी शुरुआत की थी। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण से पृथ्वी पर जो संकट उत्पन्न हो गई है, उस संकट को यथासंभव दूर करने के लिए विशेष अभियान बिहार में चलाया गया है जिसके प्रेरणाश्रोत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं। इसके लिए जल, जीवन, हरियाली का एक स्लोगन उन्होंने दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि इस कार्य की सफलता के लिए हम सभी को मिलजुलकर काम करना होगा। मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सम्राट अशोक कन्वेंशन स्थित बापू सभागार में बिहार पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित जल, जीवन, हरियाली अभियान जागरुकता कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमलोगों ने वर्ष 2011 में इसी दिन बिहार पृथ्वी दिवस का आयोजन शुरू किया था। इसका उद्देश्य पृथ्वी का संरक्षण और इस कार्य के लिए जन सहभागिता को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आज हमलोगों ने पृथ्वी को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने के लिए 11 सूत्री संकल्प लिया है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान कविता की कुछ पंक्तियां भी पढ़ी। उन्होंने कहा कि ” तुम याद करो कैसे वन में खुले ठहाके भरते थे, शेरों को डांटा करते थे, चिड़ियों से बातें करते थे, सुख-दुख में साथ निभाते थे,कैसे फिर याद कराएंगे।” आगे की पंक्तियों में उन्होंने कहा ” बादल को मोहब्बत है जिनसे,पेड़ लगाओ जल के लिए, बच्चों से मोहब्बत है तुझको तो पेड़ लगाओ कल के लिए, आने वाली पीढ़ियों के बच्चे तेरा गुण गायेंगे”।
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट से जो स्थिति उत्पन्न हो गई है उसके लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने एक विशेष अभियान चलाया है। जल, जीवन, हरियाली से संबंधित विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस ढंग से दुनिया में बृक्षों की कटाई हो रही है, उससे पर्यावरण पर गंभीर संकट पैदा हो रहा है। राज्य में पहले जहां वर्षापात 1200 से 1500 मिली मीटर था, पिछले 30 सालों में यह 1027 मिली मीटर रिकार्ड किया गया है। जबकि पिछले 13 सालों में राज्य का औसत वर्षापात 900 मिमी रह गया है।
इसी के मद्देनजर हरित आवरण क्षेत्र को बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने 24 करोड़ पौधा लगाने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें 19 करोड़ पौधा लगाया जा चुका है। जल संरक्षण के लिए सभी सरकारी क्वाटरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए काम किया जा रहा है। यह आवश्यक है कि जल संरक्षण के लिए सभी कोई मिलजुलकर काम करे। जल, जीवन, हरियाली एक ऐसा थीम है जिसे पूरी दुनिया को आत्मसात करना चाहिए। यही एक रास्ता है जिससे आनेवाले संतति को हम शुद्ध पर्यावरण, पर्याप्त मात्रा में जल और शुद्ध वायु का भंडार दे सकेंगे। हमें हमारे पूर्वजों द्वारा विरासत में जो मिला है वही हम अपने आनेवाली पीढ़ी को दें,यही हमारा परम कर्तव्य है।
आज हमलोगों विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं, कुपोषण का शिकार हो रहे हैं,शुद्ध जलवायु के लिए तरस रहे हैं, पर्यावरण प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं, शुद्ध पेयजल की समस्या का सामना कर रहे हैं। यह सब हमलोगों का खुद का देन है। जितनी संख्या में हम पेड़ काट रहे हैं,जंगल काट रहे हैं उसका दशांश भी हमलोग पेड़ नहीं लगा रहे हैं। जल की बर्बादी भी बड़े पैमाने पर हमलोग कर रहे हैं। जबकि केन्द्र की सरकार हो या राज्यों की सरकारें सभी एक स्वर में जल संचयन, पेड़ लगाओ अभियान चलाने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए कई योजनाओं पर काम करने के लिए लोगों को प्रेरित करने का काम कर रही है। ऐसे में हमें भी संजीदगी के साथ इस पर काम करना होगा। बिहार पृथ्वी दिवस की यही सार्थकता होगी।
जे.पी.श्रीवास्तव,
ब्यूरो चीफ, बिहार।





