बिहार—–
जे.पी.श्रीवास्तव, ब्यूरो चीफ, बिहार
पटना: बहुत पुरानी कहावत है कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। अभी वर्तमान समय में इसके दो उदाहरण हमारे सामने है। सत्य और ईमानदारी के पथ पर अग्रसर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। भारतवर्ष में और अनेकों राजनेता, शासन-प्रशासन से जुड़े व्यक्ति भी ईमानदारी की श्रेणी में हैं जिनके विषय में विस्तृत जानकारी नहीं है।
बिहार सरकार के शासन का एक अंग आईपीएस का नाम अभी सुर्खियों में है। अभी हाल ही में भोजपुर(आरा) में पदस्थापित नये एसपी विनय तिवारी पद ग्रहण करने की सूचना गोपनीय रीडर को देते हुए स्टेशन पर गाड़ी और अंगरक्षक भेजने की बात कही थी। इसकी जानकारी भोजपुर में पदस्थापित डीएसपी विनोद कुमार, नवादा इंस्पेक्टर संजीव कुमार,टाउन इंस्पेक्टर शंभू भगत और सार्जेंट मेजर आर.बी.चौधरी को मिल गई। ये सभी लोग पुलिस जवानों के लाव लश्कर के साथ नये एसपी के आगवानी में स्टेशन पर पहुंच गये।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वागत करने का दांव उल्टा पड़ गया। नये एसपी ट्रेन से उतरते ही तामझाम को देखते ही बिगड़ गये।सर्किट हाउस पहुंचने के साथ ही जमकर फटकार लगाई। उन्होंने सभी अधिकारियों से साफ तौर पर कहा कि वे तामझाम पर नहीं काम पर विश्वास करते हैं। उनके इस कड़े रुख के कारण सभी पुलिस पदाधिकारी सकते में आ गये। यहां तक कि उन्हें भेंट करने के लिए लाया गया गुलदस्ता गाडी में ही पड़ा रह गया। किसी की हिम्मत नहीं हुई गुलदस्ता भेंट करने की। काश बिहार के सभी प्रशासनिक पदाधिकारी विनय तिवारी के सिद्धांतों के अनुरूप चलने वाले होते तो बिहार का कायाकल्प हो जाता।

यूंही नहीं है एसपी विनय तिवारी के कर्मठता, ईमानदारी, कर्त्तव्यनिष्ठा की चर्चा। बताते हैं कि विनय तिवारी 2015 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं। अपनी ईमानदारी और सिद्धान्तों के लिए जाने जाते हैं।इनकी गिनती एक तेज तर्रार आईपीएस के रुप में होती है।
बतौर एसपी उनके सामने बालू माफियाओं और सक्रिय अपराधियों पर कारगर ढंग से अंकुश लगाने की चुनौती होगी जिसमें वे निश्चित रूप से कामयाब होंगे। क्योंकि ऐसे तेजतर्रार और ईमानदार छवि के एसपी के लिए यह कठिन नहीं होगा। जानकारी के अनुसार एसपी विनय तिवारी यूपी के ललितपुर जिला के भैलवारा गांव के निवासी हैं। इन्होंने बीएचयू से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी।इसके बाद यूपीएससी से क्वालीफाई करने के बाद इनको आईपीएस का रैंक मिला। दो वर्ष की ट्रेनिंग के बाद इन्हें बेगुसराय और गोपालगंज में तैनाती मिली थी जहां इन्होंने बखूबी अपने कार्यों को अंजाम दिया था। इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन्हें उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया था। इनकी काबिलियत को देखते हुए डीजीपी ने विनय तिवारी को सुशांत सिंह राजपूत के मौत मामले की जांच करने के लिए मुंबई भेजा था, लेकिन मुंबई पुलिस ने उन्हें वहां क्वारंटाइन कर दिया जिसके चलते जांच नहीं हो सकी।
एसपी विनय तिवारी की कार्यक्षमता, काबिलियत, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि आनेवाले दिनों में ये बहुत ऊंचे पद पर पहुंचेंगे।




