कर्नाटक कैबिनेट: दिल्ली में नड्डा से मिले बोम्मई, कहा- आज शाम तक सूची आने की उम्मीद

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कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इसी संबंध में राज्य के नए मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा के साथ विस्तार से चर्चा हुई और मंगलवार शाम तक अंतिम सूची आने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष नलिन कुमार कतील भी इस बैठक में मौजूद थे।

करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा, नड्डा जी के साथ विस्तार से चर्चा हुई। हम कल शाम तक अंतिम सूची आने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संभावित नामों की एक सूची पर चर्चा हुई और भाजपा अध्यक्ष उसपर फैसला लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक बार और चर्चा होगी जिसके बाद सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।

बोम्मई ने कहा, हमने राज्य में जमीनी हकीकत के बारे में बताया। उन्होंने भी कुछ विचार व्यक्त किए। हम एक अग्रसक्रिय और विश्वसनीय मंत्रिपरिषद देना चाहते हैं। इससे पहले, इस बैठक का समय चार बार बदला गया। मुख्यमंत्री ने भाजपा महासचिव बी एल संतोष और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बोम्मई की मुलाकात नहीं हो पाई।

सूत्रों ने बताया कि मंत्रिपरिषद विस्तार को लेकर बोम्मई और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच रविवार रात को चर्चा का एक दौर चला था। उधर, कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भाजपा सरकार पर चुटकी लेते हुए कहा कि नए मुख्यमंत्री कोविड-19 पर ध्यान देने की जगह नए मंत्रिपरिषद के विस्तार के लिए दौड़ लगा रहे हैं।

उत्तर कन्नड़ जिला मुख्यालय करवार में सिद्धरमैया ने संवाददाताओं से कहा, अस्पतालों, बिस्तरों, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोगों की मौत हो गई। ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए लेकिन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई कोविड-19 पर ध्यान केंद्रित करने की जगह मंत्रिपरिषद विस्तार के लिए दौड़-भाग कर रहे हैं।

इससे पहले आज बोम्मई ने कहा था कि पिछले मंत्रिपरिषद को ध्यान में रखते हुए विस्तार संतुलित रूप से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि नड्डा से इसपर भी चर्चा की जाएगी कि मंत्रिपरिषद का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाए या एक बार में ही कर दिया जाए। उन्होंने कहा था कि मंत्रियों का निर्धारण करने के दौरान क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा जाएगा।

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