मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को झटका, डेमोक्रेट्स की बढ़त से बढ़ी मुश्किलें; ट्रंप बोले- मैं होता, तो हम भारी बहुमत से जीतते

US Midterm Election Results 2026

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US Midterm Election Results 2026: अमेरिका में हुए 2026 के मिडटर्म चुनावों के शुरुआती नतीजों से रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। वहीं, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रदर्शन बेहतर दिखाई दे रहा है। पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। चुनाव में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने अपनी पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेने के बजाय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मैं चुनाव मैदान में नहीं था। अगर मैं चुनाव लड़ रहा होता, तो हम भारी बहुमत से जीतते। इस बात पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।” ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वे चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए खुद को जिम्मेदार नहीं मान रहे हैं। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की कि चुनाव में उनकी मौजूदगी से नतीजे अलग हो सकते थे।

चुनावी नतीजे: डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त

अमेरिका में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं। शुरुआती नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन पार्टी की चार अहम सीटों पर जीत हासिल की है। इन नतीजों से हकीम जेफ्रीस (Hakeem Jeffries) के प्रतिनिधि सभा के पहले अश्वेत स्पीकर बनने की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है। वहीं, जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ ने अपनी सीट दोबारा जीत ली है। नॉर्थ कैरोलिना में पूर्व डेमोक्रेटिक गवर्नर रॉय कूपर ने भी रिपब्लिकन पार्टी की सीट पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा, 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव हुए हैं। इन चुनावों में कई जगह रिपब्लिकन पार्टी को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

महंगाई और ईरान युद्ध से बढ़ी ट्रंप की मुश्किलें

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और एग्जिट पोल के मुताबिक, इस चुनाव में महंगाई और बढ़ती कीमतें मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे रहे। करीब 90 प्रतिशत मतदाताओं ने माना कि रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों ने उनके वोट देने के फैसले को प्रभावित किया। वहीं, लगभग दो-तिहाई मतदाताओं ने महंगाई के लिए ट्रंप को जिम्मेदार माना। गौरतलब है कि ट्रंप 2024 में महंगाई कम करने के वादे के साथ सत्ता में लौटे थे। लेकिन विदेशी सामानों पर ज्यादा टैक्स (टैरिफ) लगाने और ईरान के साथ युद्ध को लेकर उनकी नीतियों की आलोचना हुई। इन फैसलों का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ने की बात कही गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार युवा और हिस्पैनिक (लैटिन अमेरिकी मूल के) मतदाताओं के एक वर्ग ने भी रिपब्लिकन पार्टी से दूरी बनाई। इनमें से कई मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया।

मीडिया और अपनी पार्टी पर भी नाराज हुए ट्रंप

चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद ट्रंप ने मीडिया नेटवर्क फॉक्स न्यूज पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉक्स न्यूज उनके खिलाफ काम कर रहा है और डेमोक्रेटिक पार्टी को ज्यादा जगह दे रहा है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इसके कारण चैनल की टीआरपी में 27 प्रतिशत की गिरावट आई है। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी चुनावी हार को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। केंटकी जैसे रिपब्लिकन के मजबूत राज्य में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन और पार्टी के शीर्ष नेताओं से इस्तीफा देने की मांग की है। कुछ सांसदों का मानना है कि ट्रंप की गिरती अप्रूवल रेटिंग और ईरान युद्ध को लेकर उनकी नीतियों का असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा है।

क्या ट्रंप का राजनीतिक प्रभाव कम हो रहा है?

ट्रंप का यह कहना कि अगर वे चुनाव मैदान में होते तो पार्टी भारी बहुमत से जीतती, उनकी चुनावी हार से खुद को अलग रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही ट्रंप खुद चुनाव नहीं लड़ रहे थे, लेकिन मिडटर्म चुनाव उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के पहले दो वर्षों के कामकाज पर जनता की राय जानने का एक अहम मौका था। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल करती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। विपक्ष को सरकार के फैसलों, नीतियों और कामकाज की जांच करने के ज्यादा मौके मिलेंगे। ऐसे में इन चुनावों के नतीजे न सिर्फ रिपब्लिकन पार्टी, बल्कि ट्रंप प्रशासन की आगे की राजनीतिक रणनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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