बुंदेलखंड -पलायन की पीडा पुस्तक का राजा बुंदेला ने किया विमोचन
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गुजरातियों का गुजरात , बिहारियों का बिहार तो बुंदेलियों का बुंदेलखंड क्यों नहीं – राजा बुंदेला
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जनपद महोबा बुंदेलखंड से ब्यूरो चीफ राम कुमार की रिपोर्ट
कुलपहाड़ ( महोबा )
सात – सात नदियां और समूचा बुंदेलखंड प्यासा , सोने की चिड़िया कहलाने वाला यह क्षेत्र पलायन की पीड़ा समेटे अंदर से खोखला हो गया है जब बिहारियों का बिहार है , गुजरातियों का गुजरात है पंजाबियों का पंजाब है तो बुंदेलियों का बुंदेलखंड क्यों नहीं हो सकता ? यह सवाल खडा किया बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष व फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने। राजा बुंदेला ने नगर के वरिष्ठ पत्रकार व रचनाकार राकेश कुमार अग्रवाल की नई पुस्तक बुंदेलखंड – पलायन की पीडा , पृथक राज्य का बीडा के विमोचन कार्यक्रम में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक बुंदेलखंड अलग राज्य नहीं बन जाता है तब तक हजारों योजनाएं व पैकेज व्यर्थ हैं। उन्होंने कहा कि मुगलों के समय बुंदेलखंड था। ब्रितानी हुकूमत के समय बुंदेलखंड था। आजादी के समय बुंदेलखंड था लेकिन आजादी को बाद कुचक्र रचकर सरकार ने बुंदेलखंड को विभाजित कर उसका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया। सरकारों ने बुंदेलखंड को दोहन करने का चरागाह बना दिया है यहां न रोजी है न रोजगार है न शिक्षा है न चिकित्सा है जवानी पलायन को मजबूर है दर दर भटकने को मजबूर है। इसका एक ही समाधान है पृथक बुंदेलखंड राज्य।
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राजा बुंदेला , विशिष्ट अतिथि तारा पाटकर , संतोष पटैरिया ने सरस्वती मां के चित्र पर दीप प्रज्वलन व पुष्पार्चन करके की। आरबीपीएस के संरक्षक प्रमोद कुमार अग्रवाल , कार्यक्रम के संयोजक सुरेन्द्र कुमार अग्रवाल एवं आयोजक अमित कुमार अग्रवाल ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण व स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
आकर्षक वेशभूषा में सजी विद्यालय की बालिकाओं आस्था, अन्वि व परिधि ने सासो पनिया कैसे जाऊं व ईशा शक्ति ने राई नृत्य के माध्यम से नयनाभिराम प्रस्तुति देकर बुन्देलखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा को जीवंत कर दिया।
पुस्तक के रचनाकार राकेश कुमार अग्रवाल ने अपनी कविता फटेहाल – बदहाल – बुंदेलीलाल के माध्यम से पुस्तक में समाहित बुंदेलखंड की पीड़ा और यथार्थता का सटीक खाका खींचा। पुस्तक परिचर्चा में दिल्ली की दीपाली सिन्हा बुंदेलखंडी , बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर , साहित्यकार व संस्कृतिविद संतोष पटैरिया ने पुस्तक के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में बीएनवी डिग्री कालेज राठ के पूर्व प्रिंसिपल डा. लक्ष्मी नारायण अग्रवाल , पूर्व प्रवक्ता राधेलाल यादव, शिवनारायन खरे एडवोकेट , डॉ ए पी वर्मा , सुबोध सिन्हा दिल्ली , अनिल अरजरिया, प्रकाश यादव , आनंद द्विवेदी , संजय अग्रवाल , दिनेश अग्रवाल , सलीम रंगरेज , आकाश मिश्रा , सोनू सिंह चौहान , प्रताप सिंह बुंदेला समेत तमाम लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सिद्धगोपाल द्विवेदी ने किया।




