बारां,16 जनवरी। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अवसर पर बारां पधारे राष्ट्रीय संत एवं श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज ने बारां जिले की शाहबाद तहसील में प्रस्तावित ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद की हाइड्रो पावर बिजली परियोजना पर गहरा दुख एवं चिंता व्यक्त की। शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के संरक्षक प्रशांत पाटनी ने बताया कि
कथा उपरांत बारां से प्रस्थान करने से पूर्व अंतिम दौर में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप शाह मधुप द्वारा लिए गए साक्षात्कार में राष्ट्रीय संत स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज ने कहा कि “यह अत्यंत पीड़ादायक है कि एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा निरंतर वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संतुलन की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाती है, जिनसे घने जंगल, प्राकृतिक जल स्रोत, वन्य जीव और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने इसे नीति और व्यवहार के बीच विरोधाभास बताते हुए कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य ही भारतीय जीवन दर्शन का मूल है।”
महाराज श्री ने कहा कि” विकास आवश्यक है, किंतु ऐसा विकास जो प्रकृति को नष्ट कर दे, भावी पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ के समान है। उन्होंने चेताया कि जंगलों के विनाश और पारिस्थितिकी असंतुलन का दुष्परिणाम आने वाले वर्षों में समाज को भोगना पड़ेगा। पेड़, पर्वत, नदियां और वन केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्तियां हैं, जिनका संरक्षण हमारा नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व है।”
शाहबाद क्षेत्र को प्राकृतिक संपदा से समृद्ध बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि “यहां के जंगल और जैव विविधता केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय धरोहर हैं। ऐसे में बिना व्यापक जनसहमति, पर्यावरणीय प्रभावों के गंभीर अध्ययन और पारदर्शिता के किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना अनुचित है।”
अंत में स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज ने शासन-प्रशासन से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को केवल औपचारिक नारा न बनाएं, बल्कि व्यवहार में भी उतारें। साथ ही उन्होंने समाज से भी जागरूक होकर प्रकृति, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्चा राष्ट्र निर्माण तभी संभव है, जब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।





