पूर्व रेलमंत्री स्व. रामविलास पासवान का बंगला आवंटित हुआ रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को

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बिहार—–

पटना:कहते हैं चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद से अभी चिराग पासवान का समय अच्छा नहीं चल रहा है। एक पर एक झटका उनको मिलता ही रह रहा है। अभी पिछले दिनों उनकी पार्टी लोजपा दो खेमें में बंट गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी से उन्हीं के सगे चाचा पशुपति कुमार पारस ने बेदखल कर दिया। हालांकि अभी भी चिराग पासवान अपने को असली लोजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष मानते हैं और उसी के अनुरूप अपना काम भी कर रहे हैं।
सच्चाई यह है कि चूंकि पशुपति कुमार पारस को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया गया है और भाजपा की सरपरस्ती पशुपति कुमार को प्राप्त है। ऐसे में इसका लाभ उन्हें मिल रहा है। यहां राजनीति को परखने और तदनुसार काम करने में चिराग से चूक होने की बात सामने दिखाई दे रही है। कहते हैं कि राजनीति में वही व्यक्ति सफल होता है जो अपने पराये की पहचान रखता हो, इर्द गिर्द रहनेवाले लोगों पर पैनी नजर रखता हो और समय पर उसका काट करने की मादा रखता हो।
बेसक चिराग पासवान एक नवयुवक, उर्जा से परिपूर्ण, लोगों के दुःख दर्द को समझने वाले नेता हैं। विरासत में उन्हें एक बड़े दल का कमान संभालने का मौका भी मिला। परन्तु उस समय रामविलास पासवान जैसे कद्दावर नेता, राजनीति की गहरी परख रखनेवाले उनके पिता का संरक्षण उन्हें प्राप्त था। परन्तु सत्ता का सुख हर कोई प्राप्त करना चाहता है और इसके लिए कुछ भी करना उनलोगों के लिए गलत नहीं होता। इतिहास गवाह है कि सत्ता की प्राप्ति के लिए इसी हिन्दुस्तान में लोगों ने क्या कुछ नहीं किया। लगता है कि चिराग पासवान को समय की पहचान करने और सही समय पर सही निर्णय लेने में चूक हुई है।
ऐसे समय में दिवंगत रामविलास पासवान के 12 जनपथ सरकारी आवास को खाली करने का आदेश देने के बाद उस बंगला को केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को आवंटित कर दिया गया है। केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने एक नोटिस जारी कर 12 जनपथ आवास को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नाम आवंटित कर दिया है। गौरतलब है कि इसके पहले उक्त मंत्रालय द्वारा एक नोटिस जारी कर उक्त बंगला को खाली करने के लिए कहा गया। अभी उस बंगला में रामविलास पासवान की पत्नी,बेटा चिराग पासवान और परिवार के अन्य लोग यहां रह रहे हैं। चिराग पासवान ने अपने पिता की पहली बरसी 8 अक्टूबर तक का समय बंगला खाली करने के लिए मांगा है।
रामविलास पासवान इस बंगले में 1989 से रहते आ रहे थे। पिछले साल अक्टूबर में उनका देहांत हुआ था। इतनी लम्बी अवधि तक इस बंगले में रहने के कारण इसे ही लोजपा का पार्टी कार्यालय बना लिया गया था। पार्टी के कार्यकर्ता इसी पते पर पत्राचार किया करते थे।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद नये मंत्रियों को बंगला अलाॅट करना शुरू हो गया है। इसी क्रम में खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री पशुपति कुमार पारस तथा इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह को 12 जनपथ का बंगला अलाॅट करने के लिए पूछा गया था। लेकिन दोनों ने इंकार कर दिया था। तब जाकर रेल मंत्री को यह बंगला अलाॅट हुआ है।
इसे कहते हैं समय की मार। जिस बंगला में लगभग 33 वर्षों से दिवंगत नेता रामविलास पासवान रहते थे। आज उसी बंगला को खाली करने की नौबत आ गई।
जे.पी.श्रीवास्तव,
ब्यूरो चीफ, बिहार।