लेख–
दिल्ली–
मैं शैलेश कुमार गिरि राष्ट्रीय प्रवक्ता – अखिल भारतीय गोस्वामी महासभा और राष्ट्रीय महासचिव सह राष्ट्रीय प्रवक्ता व झारखंड-बिहार प्रदेश भारत रत्न से सम्मानित महामहिम भूतपूर्व राष्ट्रपति वी वी गिरी के जयंती पर समस्त देशवासियों , किसान मजदूर व युवा पीढ़ी की ओर से अंतर्रात्मा से याद करते हुए वी वी गिरी जी को कोटि कोटि नमन करते हुए ।
कुछ शब्द व्यक्त कर रहा हूं –
यदि आज हमारे देश में श्रम को उसका अधिकार मिल रहा है, अगर आज देश हर मजदूर अपने हक के लिए बोल पा रहा है, तो उसके लिए एक इन्सान को धन्यवाद बोलना चाहिए, वो है वी वी गिरी. वी वी गिरी ने मजदूर वर्ग को एक नयी आवाज दी, उनके हक की लड़ाई लड़ी, जिसकी बदौलत आज उनको वो सम्मान मिल पा रहा है. ये अपना करियर लॉ में बनाना चाहते थे, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम के समय अपने आप को रोक नहीं पाए और देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।
*वी वी गिरी जीवन परिचय*
स्वतंत्र भारत के चौथे राष्ट्रपति वी वी गिरी का जन्म 10 अगस्त, 1894 को ब्रह्मपुर, ओड़िशा में हुआ था। वी.वी. गिरी के पिताजी का नाम वी.वी. जोगिआह पंतुलु व माता सुभ्द्राम्मा थी। जो वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक्टिव मेम्बर थे। वी वी गिरी एक वकील और स्थानीय बार काउंसिल के नेता थे।वी. वी. गिरी जी की स्कूली शिक्षा ब्रह्मपुर में ही संपन्न हुई। 1913 में वकालत की पढाई के लिए वे आयरलैंड चले गए, डबलिन यूनिवर्सिटी से 1913-16 तक पढाई की। वहां उनकी मुलाकात डी वलेरा से हुई, जो एक प्रसिद्ध ब्रिटिश विद्रोही थे और उनसे प्रभावित होकर वे आयरलैंड की स्वतंत्रता के लिए चल रहे ‘सिन फीन आंदोलन’ से जुडे और अपना योगदान दिया। दंड स्वरुप उन्हें इस आयरलैंड से बाहर निकल दिया गया। स्वतंत्रता के इस आंदोलन में उनकी मुलाकात इमोन दे वलेरा, माइकल कॉलिंस , डेस्मंड ,जेम्स कोन्नाली आदि जैसे महान स्वतंत्रता सेनानीयों से हुई, जिनसे इनके निकट संबंद्ध बन गए थे। वहां से प्रभावित हो 1916 में वे भारत लौटे।
वर्तमान में मजदूर देश के
किसी भी जगह काम कर रहे है, हक़ की आवाज उठा सकते है। मजदूरों के सर्वाधिक ताकत दिनों दिन बढ़ रही है यदि इसका श्रेय किसी को जाता है तो वो समाज सुधारक वी वी गिरी।
निम्न स्तर के श्रमिक मजदूरों के प्रति गिरी जी बराबर सहानुभूति और चिंता होती थी । भारत लौट स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और कई श्रमिक संगठनों में भी सक्रिय रहे।
वी वी गिरी का राजनैतिक दौर
सन 1952 में पाठापटनम सीट से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बन गए। श्रम मंत्री रहते हुए ये 1954 तक सराहनीय कार्य किया। इस कार्य के लिए 1975 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित गया।
वी वी गिरी उत्तर प्रदेश, मैसूर एवं केरल के राज्यपाल भी रहे।
1967 में डॉ राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के समय तब वी वी गिरी को उपराष्ट्रपति बनाया गया था ।
3 मई 1969 को डॉ जाकिर हुसैन की अकाल मृत्यु के बाद रिक्त राष्ट्रपति पद को भरने के लिए वी वी गिरी जी को राष्ट्रपति बना दिया गया।
1969 में राष्ट्रपति चुनाव हुआ । तब इंदिरा गाँधी ने वी वी गिरी को फिर से राष्ट्रपति पद से नवाजा। वी वी गिरी जी 1969 से 1974 तक पद पर बने रहे और पद की गरिमा बढाई ।
वी वी गिरी जी को किताब लेखन में भी रूचि थी. उनके द्वारा लिखी हुई किताबे “श्रमिकों की समस्याएं” अत्यधिक लोकप्रिय रही।




