बिहार——
जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार
पटना: प्राप्त सूचनानुसार वीआईपी के मुकेश सहनी पिछले दिनों यूपी की घटना क्रम से काफी नाराज़ चल रहे हैं। उन्होंने एनडीए में मंत्री की बात नहीं सुनी जाने का आरोप लगाते हुए जीतनराम मांझी के साथ मिलकर इस पर विचार करने की बात कही थी। उनके सुर में सुर मिलाते हुए जीतनराम मांझी ने एनडीए को सलाह दे डाली कि सबकी बातें सुनी जानी चाहिए। बात यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि मुकेश सहनी ने एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए जबकि वे विधानसभा में उपस्थित थे। उनकी नाराजगी इतनी बढ़ी हुई थी कि उन्होंने एनडीए में विधायकों और मंत्रियों की बात नहीं सुनने की बात सार्वजनिक करना शुरू कर दिया।
बताते चलें कि मुकेश सहनी वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ बिहार मंत्रिमंडल में पशुपालन एवं मत्स्य मंत्री भी हैं। यह भी पता चला है कि जो आरोप मुकेश सहनी ने एनडीए पर लगाया है कि वहां किसी विधायक या मंत्री की बात नहीं सुनी जाती,वही आरोप राज सैनी ने मुकेश सहनी के उपर लगाया है। सैनी का कहना है कि पार्टी में कोई तालमेल नहीं है। पार्टी के सभी निर्णय सामूहिक रूप से नहीं लिया जाता है।उनका यह भी कहना है कि पार्टी अध्यक्ष से नियमित रूप से बात भी नहीं होती है।
उधर वीआईपी पार्टी के विधायक राजू सिंह के विरोध का स्वर अपने ही पार्टी अध्यक्ष मुकेश सहनी के विरुद्ध मुखर हो रहा है। राजू सिंह का आरोप है कि वे जो भी निर्णय लेते हैं अकेले लेते हैं। पार्टी विधायकों से निर्णय के संबंध में कभी बात नहीं करते हैं। मुकेश सहनी के एनडीए बैठक में शामिल नहीं होने के फैसले को उन्होंने गलत बताया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमलोग बैठक में इसलिए नहीं गये क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि बैठक में नहीं जाना है। हालांकि इस मुद्दे पर पार्टी अध्यक्ष से बात करने की बात भी उन्होंने कही। उनका कहना है कि यदि उन्हें लगता है कि एनडीए में उनको सम्मान नहीं दिया जा रहा है तो सीधे-सीधे एनडीए से अलग हो जाना चाहिए। यह नहीं चलेगा कि एनडीए में बने भी रहें और एनडीए पर सवाल भी उठाते रहें। बिहार में अधिकारियों द्वारा मंत्री की बात नहीं सुने जाने के मुकेश सहनी के आरोप को भी उन्होंने गलत बताया। यह तो वही बात हुई कि गये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास।
अब देखना है कि इस रुठने मनाने का क्या फलाफल होता है। राजनीति में यह सब चलता रहा है और चलता रहेगा।




