बिहार——–
जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार
पटना: भारतवर्ष की राजनीति में दो ऐसे नाम हैं जिनके फैसले हमेशा चौंकाने वाले होते हैं। इसमें पहला नाम भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का है और दूसरा नाम बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कब क्या निर्णय लेंगे इसका कानों-कान किसी को खबर नहीं होती है। जब भी वे कोई बड़ा निर्णय लेते हैं वह चौंकाने वाला ही होता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी चौंकाने वाले निर्णय के लिए जाने जाते हैं।
कभी नीतीश कुमार के धुर विरोधी,सर पर कफन बांध कर नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की ज़िद पर अड़े उपेन्द्र कुशवाहा आज नीतीश कुमार के करीब बन चुके हैं। उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा का विलय जेडीयू में होते ही नीतीश कुमार ने उन्हें सम्मान जनक पद देते हुए जदयू संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया। इतना ही नहीं उन्हें पार्टी को मजबूत करने के लिए बिहार के 38 जिलों का दौरा करने की सलाह भी दे डाली।
जानकार बताते हैं कि बिहार में जनता दल यूनाइटेड से एक बार फिर चौंकाने वाली खबर आ सकती है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के स्थान पर ऐसा नाम आ सकता है जिसकी कल्पना पार्टी नेताओं ने नहीं की होगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक तीर से कई लोगों का मुंह बंद कर सकते हैं नीतीश कुमार। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने उपर जाति आधारित राजनीति करने के आरोप से आहत हैं। इस कारण जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर चल रहे कयासों पर विराम लगाते हुए चौंकाने वाले नाम पर अपनी मुहर लगा सकते हैं।
कयास लगाया जा रहा है कि जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह हो सकते हैं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष। बताया जाता है कि वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में जेडीयू के शामिल होने से राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने इसलिए मना कर दिया था कि उनके एक सदस्य को ही मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा था।उस समय भी आरसीपी सिंह का ही नाम आया था। ललन सिंह का पत्ता उस समय भी साफ हो गया था। बताते चलें कि 2021 में हुये केन्द्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में जेडीयू कोटे से आरसीपी सिंह,ललन सिंह और संतोष कुशवाहा का नाम लिया जा रहा था। लेकिन हुआ ठीक इसके विपरित। केवल आरसीपी सिंह को ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार आरसीपी सिंह के इस निर्णय से खुश नहीं थे। नीतीश कुमार पर यह आरोप लग रहा था कि वे अपनी जाति के व्यक्ति को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कराकर लव-कुश समीकरण को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
बताते हैं कि 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू नम्बर 1 की पार्टी बनी थी; जबकि 2020 के चुनाव में तीसरे नंबर की पार्टी जदयू बन गई है। इससे नीतीश कुमार बेहद चिंतित हैं। वह इसे फिर से नंबर 1 पार्टी बनाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नीतीश कुमार अपने सहयोगी और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष का बागडोर सौंप कर एक साथ कई संदेश देना चाहेंगे। ललन सिंह को अध्यक्ष बनाकर अपने उपर लग रहे जाति आधारित राजनीति से छुटकारा पा सकते हैं। साथ-साथ विरोधियों सहित बिहार की जनता को कई संदेश दे सकते हैं। ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बिहार और उत्तरप्रदेश के भूमिहार समाज को बड़ा संदेश दे सकते हैं। इसका लाभ उन्हें उत्तरप्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि आरजेडी के एम वाई समीकरण की तरह जेडीयू पर लगनेवाले लव-कुश समीकरण के आरोप को एक झटके में समाप्त किया जा सकता है। हालांकि यह बात भी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष कोई भी हो कमान तो नीतीश कुमार के हाथ में ही होगी।




