Tokyo Olympics 2020: जानिए क्या है सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू के ओलंपिक रिंग्स वाली ईयररिंग की रोचक कहानी

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भारत की स्टार महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में शनिवार को सिल्वर मेडल जीतकर नया इतिहास रचा। चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा में 202 किग्रा (87 किग्रा + 115 किग्रा) भार उठाकर सिल्वर मेडल जीता। वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में चानू ने भारत को 21 साल के बाद मेडल दिलाया।  उनकी बदौलत भारत अभी मेडल तालिका में संयुक्त रुप से 12वें स्थान पर है। चीन तीन गोल्ड सहित चार मेडल जीतकर टॉप पर है। चानू से पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक 2000 में वेटलिफ्टिंग में कांस्य मेडल जीता था।

मीराबाई चानू ओलिंपिक्स रिंग के डिजाइन की ईयररिंग पहनती हैं, जो रियो ओलिंपिक के बाद उनकी मां ने उन्हें दी थी। पांच साल पहले उनकी मां ने अपने गहने बेचकर ये  ईयररिंग उन्हें गिफ्ट में दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि ये रिंग रियो ओलंपिक में उनके लिए ‘गुड लक’ साबित होंगी। जब मीराबाई चानू की मां तोम्बी लीमा ने देखा कि मुकाबले के दौरान उनकी बेटी ने उनकी दी ईयररिंग पहनी है तो वो अपने आंसू रोक नहीं पाई। 

Tokyo Olympics 2020: मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल जीतकर रचा इतिहास, निशानेबाजों ने किया निराश

तोम्बी लीमा ने पीटीआई से कहा, ‘मैंने टीवी पर ईयररिंग देखी, जो मैंने ये उसे 2016 में रियो ओलंपिक से पहले दी थी।  मैंने मेरे पास पड़े सोने के गहने और अपनी बचत से इन्हें बनवाया था जिससे कि उसका भाग्य चमके और उसे सफलता मिले। उन्होंने आगे कहा कि इन्हें देखकर मेरे आंसू निकल गए और जब उसने मेडल जीता तब भी। मीराबाई के पिता (सेखोम कृति मेइतेई) की आंखों में भी आंसू थे, खुशी के आंसू। उसने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की।

वहीं मीराबाई चानू ने मेडल जीतने के बाद कहा कि मैं बहुत खुश हूं, मैं पिछले पांच सालों से इसका सपना देख रही थी। इस समय मुझे खुद पर गर्व महसूस हो रहा है। मैंने गोल्ड मेडल की कोशिश की लेकिन सिल्वर मेडल भी मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

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