तेजस्वी ने दिया चिराग को साथ आने का खुला ऑफर,जानिए राजनीति का नया फलसनामा

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बिहार —-

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना: राजनीति शास्त्र और धरातल की राजनीति में बहुत बड़ा फर्क होता है। यह शास्वत सत्य है कि राजनीति में कोई किसी का न तो स्थायी मित्र होता है और न स्थायी शत्रु। देश की आजादी में जिन नेताओं ने अपनी कुर्बानियां दी, जिन्होंने यातनाएं सहीं वे सभी आज इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गए हैं।

जबसे राजनीति में सुचिता का अभाव हुआ है, धनलोलुपता का बोलबाला हुआ है, तबसे विधायकों/ सांसदों की खरीद-फरोख्त धड़ल्ले से शुरू हो गयी है। कब किस पार्टी के नेता बेहतर समाज सेवा की बात कर नई पार्टी ज्वाइन कर लेंगे कहना और बताना मुश्किल है। राजनीतिक ध्रुवीकरण का कवायद सत्ता समीकरण के लिए आज के दिनों में अत्यंत आवश्यक है।

सत्ता में बने रहने तथा सत्ता में आने के लिए राजनैतिक दूरदर्शिता का होना अति आवश्यक है। जिसे जितना ज्ञान होगा,जितनी राजनैतिक समझ होगी उसका पकड़ राजनीति पर उतना ही मजबूत होगा। खासतौर पर बिहार की राजनीति और राज्यों की राजनीति से बिल्कुल अलग है। बिहार में अभी भी जातिगत राजनीति, अगड़ा-पिछड़ा की राजनीति सिर चढ़कर बोल रहा है।

इसी परिप्रेक्ष्य में तेजस्वी यादव और चिराग पासवान के बीच में साथ आने की बात बड़े जोर-शोर से चल रही है। बल्कि यों कहें कि तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान को साथ आने के लिए ऑफर दिया है। यह ऑफर ऐसे समय में दिया जा रहा है जब चिराग पासवान 5 जुलाई से हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा पर निकलने वाले हैं। उनका आशीर्वाद यात्रा ऐसे समय में हो रहा है जब एलजेपी में टूट के बाद खुद उनके चाचा ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। दूसरी ओर बीजेपी जिससे चिराग पासवान को बड़ी उम्मीद थी उसने भी किनारा किसी कर लिया है। इसको लेकर चिराग पासवान बहुत आहत हैं और नये सिरे से राजनीतिक जमीन हासिल करने की तैयारी में उनकी यात्रा 5 जुलाई से शुरू होने जा रही है। तेजस्वी एलजेपी में टूट का ठीकरा जेडीयू के मत्थे फोड़ रहे हैं और चिराग को साथ आने का न्योता देकर एक बड़ा सियासी दांव उन्होंने चल दिया है।

तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान को उन दिनों की याद दिलाते हुए कहा है कि वर्ष 2010 में जब एलजेपी के एक भी सांसद या विधायक नहीं थे तब आरजेडी ने उनके पिता रामविलास पासवान को अपने दम पर राज्यसभा में भेजा था। हालांकि यह भी सत्य है कि आरजेडी के नेता शुरू से ही चिराग को साथ आने का ऑफर देते आ रहे हैं। अब तेजस्वी ने खुलकर उन्हें साथ आने का न्योता देकर राजनीति के गलियारे में एक हलचल ला दिया है। यदि चिराग पासवान आरजेडी के साथ आते हैं तो इसका दूरगामी परिणाम सामने आ सकता है।यादव और पासवान वोटों का समीकरण आगामी लोकसभा चुनाव में अपना रंग दिखा सकता है। हालांकि अभी तक चिराग पासवान ने खुलकर अफनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।