बिहार–
जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार
बिहार: अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निषेध दिवस एक अंतरराष्ट्रीय समस्या की ओर विश्व भर के प्रबुद्ध नागरिकों/साहित्यकारों/पत्रकारिता जगत से जुड़े मीडिया कर्मियों/विश्व के सभी देशों में चल रही सरकारों का ध्यान आकर्षित करती है। कहना नहीं होगा कि नशा सेवन आज पूरे विश्व में एक विकराल समस्या बन कर उभरी है। इसके निदान के लिए जो भी कदम अबतक उठाये गये हैं वह नाकाफी है। आवश्यकता इस बात की है कि कम-से-कम आज अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ निरोधक दिवस 26 जून 2021 को हम इस पर गहराई के साथ विचार करें।
सर्व विदित है कि आज के दिन पूरे विश्व में इस दिवस को अपने-अपने ढंग से मनाया जाता है। हमारे नेतागण/सामाजिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों/साहित्यकारों/पत्रकारों द्वारा कुछ लिखकर,कुछ विज्ञप्ति जारी कर,कुछ गोष्ठियां कर और कुछ लोगों की भीड़ को संबोधित कर अपने कर्तव्य का इतिश्री समझ लेते हैं। नतीजा समस्या ज्यों कि त्यों बनी रह जाती है।
आइये जानते हैं इस दिवस के संबंध में कुछ विशेष। नशीली वस्तुओं और पदार्थों के निवारण हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसम्बर 1987 को एक प्रस्ताव संख्या 42/112 पारित कर प्रत्येक वर्ष 26 जून को “अंतरराष्ट्रीय नशा व मादक पदार्थ निषेध दिवस” मनाने का निर्णय लिया था। तबसे इसे प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक तरफ लोगों में नशा सेवन के विरुद्ध जागरूकता पैदा करने की तो दूसरी ओर नशे के आदी लोगों के उपचार की दिशा में कदम उठाने की है। ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्यकाल यूएनओडीसी बड़ी सिद्त के साथ इस अवसर पर विभिन्न देशों द्वारा उठाए जा रहे कदमों,इस मार्ग में उत्पन्न चुनौतियों के निवारण के लिए किये जा रहे कार्यों को सहेज कर रखने के साथ आवश्यक कदम उठाने की सलाह देती है।
यह आवश्यक है कि देश हित,समाज हित और स्वस्थ्य समाज के हित में मादक पदार्थों के सेवन से लोगों को रोकने,उनमें इसके दुष्प्रभाव के प्रति जागरूक करने के लिए ईमानदारी के साथ हम संकल्प लें। न केवल संकल्प लें बल्कि इसे कार्य रुप में परिणत करें। यही इस दिवस को मनाने का सार्थक कदम होगा।




