युग पुरुष,विकास पुरुष, सुशासन के पुरोधा,समाजवाद के पोषक नीतीश कुमार

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बिहार–

जे.पी.श्रीवास्तव की कलम से

 

 

बिहार: देश,काल, राजनीति और समाज के प्रति चिंतन करनेवाले युग पुरुष, विकास पुरुष और समाजवाद के पुरोधा श्री नीतीश कुमार की चर्चा करने का यह उपयुक्त समय है। उनके जीवन के विषय में आम जनता को ज्यादा जानकारी मिले यह भी इस आलेख का उद्देश्य है।

एकमहान पुरुष के विषय में लिखने के लिए ज्ञानवान होना नितांत आवश्यक है। परन्तु अल्प ज्ञान के आधार पर कुछ लिखने की प्रेरणावश इस आलेख को लिखा जा रहा है। इस देश में एक-से-बढ़कर एक विद्वान, मनीषी, राजनीति के प्रखर जानकार, समाजवाद के पुरोधा हुये हैं। उन्हीं पुरोधाओं में से एक नाम नीतीश कुमार का है।

अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तियों का जन्म एक साधारण परिवार में अक्सर होता है। लेकिन कहते हैं न कि व्यक्ति अपनी प्रतीभा के बल पर, अपनी कार्यकुशलता के बल पर और कठोर सिद्धांत के बल पर आगे बढ़ता है तो फिर पिछे मुडकर नहीं देखता। लोग उसके मुरीद होते चले जाते हैं। उसकी ईमानदारी, कर्मठता,लगन और समाज के प्रति समर्पण उसे ऊंचे स्थान पर पहुंचाने में देर नहीं लगाती।

हम चर्चा कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की। नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना जिला के बख्तियारपुर में हुआ था। इन्होंने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की थी। इनके पिताका नाम स्वर्गीय कविराज राम लखन सिंह,माता का नाम स्वर्गीय परमेश्वरी देवी तथा पत्नी का नाम स्वर्गीय मंजू कुमारी सिन्हा है। इन्हें सिर्फ एक पुत्र हैं जिनका नाम निशांत कुमार है।

एक कर्मयोगी की चर्चा करना और उनके विषय में कुछ कहना,कुछ लिखना अत्यंत दुरूह कार्य होता है। फिर भी ऐसे महापुरुष के विषय में लिखकर मैं सवयं आत्मसंतुष्ट होना चाहता हूं, इसलिए लिख रहा हूं। यदि इस लेख से अन्य लोग भी प्रभावित हुए तो मैं अपने को धन्य समझूंगा।

कर्मयोगीनीतीश कुमार की शिक्षा-दीक्षा मैकेनिकल इंजीनियरिंग तक जाकर समाप्त हुई। लेकिन कहते हैं न कि उनका जन्म राजनीति के क्षेत्र में मील का पत्थर बनने के लिए हुआ था, फिर अन्य क्षेत्र में भाग्य आजमाने का कोई मतलब नहीं था। राजनीति के क्षेत्र में एक सिद्धांत के साथ उनका पदार्पण हुआ जो आज तक कायम है।

इमानदार छवि, भ्रष्टाचार से किसी कीमत पर समझौता नहीं करने के लिए अडिग, सवेरे उठने के बाद और रात्रि में सोने से पहले केवल और केवल बिहार की चिंता, बिहारवासियों की चिंता,समाज के दवे कुचले, गरीब-गुरबा, दलितों, अल्पसंख्यकों की चिंता, विशेष कर नारी सम्मान, पढ़ने वाली बेटियों के सर्वांगीण विकास की चिंता में सतत रत रहनेवाले व्यक्ति का यदि कोई नाम है तो वह हैं नीतीश कुमार।

राजनीति में आने से पहले ये बिहार राज्य बिजली बोर्ड में काम किया करते थे। लेकिन इन्हें तो आना राजनीति में था इसलिए इन्होंने बिजली बोर्ड की नौकरी छोड़ दी। इनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत 1977 में हुई थी। इसी समय में देश के महान नेता और संपूर्ण क्रांति के प्रणेता जय प्रकाश नारायण के संपर्क में आये और संपूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिये।

पहली बार 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ें। परन्तु चुनाव में सफलता नहीं मिली। फिर भी उनके उपर इसका कोई असर नहीं हुआ और निरन्तर वे आगे बढ़ते रहे। उनके राजनैतिक गुरुओं में जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और जार्ज फर्नांडीज जैसे महान नेताओं का नाम आता है। इन सभी का इनके राजनीतिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

पहले पहल बार नीतीश कुमार 1985 में बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गये। 1987 में बिहार युवा लोकदल के अध्यक्ष बने। 1989 में जनता दल के महासचिव बने। 1989 उनके राजनैतिक जीवन का अहम समय साबित हुआ। इसी साल वे 9 वीं लोकसभा के सदस्य चुने गये। 1990 में कुछ समय के लिए उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में कृषि एवं सहकारी विभाग का राज्य मंत्री बनाया गया।

दसवीं लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार पुनः लोकसभा के सदस्य बनें और संसद में जनता दल के उपनेता बने। तकरीबन 2 साल बाद 1993 में उन्हें कृषि समिति का चेयरमैन बनाया गया। 1996 में पुनः 11 वीं लोकसभा के लिए चुने गये और 1996 से 1998 तक रक्षा समिति के सदस्य रहे। 1998 में वे 12 वीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इस बार उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री बनाया गया। लेकिन दुर्भाग्यवश 1999 में हुई गैसल ट्रेन दुर्घटना के कारण उन्होंने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

साल 1999 में 13 वीं लोकसभा के लिए वे पुनः निर्वाचित हुए और इस बार उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में भूतल परिवहन मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। परन्तु किसी कारणवश इन्होंने नवम्बर 1999 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। फिर तुरंत बाद इन्हें कृषि मंत्रालय का कृषि मंत्री बनाया गया जहां वे नवंबर 1999 से मार्च 2000 तक कृषि मंत्री के पद को सुशोभित किये।

वर्ष 2001 में इन्हें रेल मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया और 2004 तक केन्द्रीय रेल मंत्री का कार्य भार इन्होंने संभाला। 2004 में वे 14 वीं लोकसभा के लिए चुने गए। इस बार इन्हें कोयला और इस्पात समिति, सामान्य प्रयोजन समिति और विशेषाधिकार समिति का सदस्य बनाया गया।

इसी बीच इन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री का पद 3 मार्च 2000 को संभाला था और राजनैतिक कारणों से इन्हें 10 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस पद को छोड़ने के बाद इन्हें फिर से केन्द्र में कृषि मंत्री बनाया गया जहां एक साल तक ये कृषि मंत्री के पद पर रहे।

फिर 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक बिहार के मुख्यमंत्री पद को इन्होंने सुशोभित किया और बिहार में कानून का राज स्थापित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद ,26 नवंबर 2010 से 19 मई 2014तक,22 फरवरी 2015 से अबतक मुख्यमंत्री पद को संभाल रहे हैं। बिहार के ये पहले मुख्यमंत्री हैं जो लगातार 16 वें वर्ष में मुख्यमंत्री के पद को सुशोभित करने का कीर्तिमान स्थापित कर 20 वर्षो तक इस पद को सुशोभित करने की ओर कदम बढ़ा दिया है।

विकास पुरुष, सुशासन बाबू, इमानदार छवि, अपने परिवार की चिंता किये बिना पूरे बिहार को अपना परिवार मानने, निरन्तर देश और राज्य के विकास की चिंता करने, कानून का राज्य स्थापित करने, विकास के मानक पर राज्य को खरा उतारने, लम्बा राजनैतिक अनुभव से ओतप्रोत किसी व्यक्ति का नाम है तो वह नाम है “नीतीश कुमार” और केवल”नीतीश कुमार”।

राज्य को शराब की बिक्री से प्राप्त लगभग 5 हजार करोड़ धनराशि को आम जनता, गरीब-गुरबा की भलाई के लिए कुर्बान करते हुए अप्रैल 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लागू करने की घोषणा कर एक अत्यंत साहसिक कदम उठाने का कार्य कर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय इन्होंने दिया है। इतना ही नहीं महिला सशक्तिकरण को मूर्त रूप देने के लिए जीविका दीदियों के समूह का निर्माण कराकर बहुत सारे कार्य उन्हें सौंपे गये हैं। बालिकाओं को साइकिल देने की बात हो, मुख्यमंत्री कन्या समृद्धि योजना हो, मेडिकल एवं इंजीनियरिंग में पढ़ाई के लिए नामांकन में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात हो, सभी को कार्यरूप देने का काम माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया है।

इन्हें मिले पुरस्कारों की थोड़ी चर्चा यहां करना आवश्यक जान पड़ता है:- वर्ष 2010 में एनडीटीवी द्वारा राजनीति में,सीएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर अवार्ड-2010 में, फोर्ब्स” भारत का व्यक्ति का वर्ष” अवार्ड-2010 में, एमएसएन इंडिया ऑफ द ईयर अवार्ड-2010 में तथा जेपी मेमोरियल पुरस्कार 2013 में इन्हें मिले चुका है।

बिहार में जन्मे इस महान व्यक्ति, महान धरोहर, कर्मयोगी, विकास पुरुष, सुशासन बाबू को पाकर बिहार की जनता अपने को गौरवान्वित महसूस करती है।

(जे पी श्रीवास्तव)

ब्यूरो चीफ – बिहार

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