Delhi Air Pollution: सर्दियों की शुरुआत होते ही देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के करीब पहुंच गया है। वहीं, 20 से ज्यादा इलाकों में AQI 400 के पार दर्ज किया गया है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, रोहिणी और बवाना जैसे इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। इन इलाकों में हवा इतनी खराब है कि स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है। हर साल नवंबर की शुरुआत में दिल्ली के आसमान में धुंध छाने लगती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। प्रदूषण की वजह से न केवल लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो रही है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
Delhi Air Pollution: किन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण?
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में लगे मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिल रहे आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। CPCB के रियल-टाइम आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के करीब 21 स्टेशनों पर AQI गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। पंजाबी बाग में AQI 452, जहांगीरपुरी में 450 से 462 और रोहिणी में 435 दर्ज किया गया। वहीं, मंडका और IIT दिल्ली में AQI 436 से 446 के बीच रहा। हवा में PM2.5 और PM10 जैसे छोटे कणों की मात्रा बढ़ने से प्रदूषण का स्तर और खराब हो रहा है। ये कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश करके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दिल्ली का औसत AQI भी लगातार बढ़ रहा है और इसने पिछले 287 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें मौसम में बदलाव, पराली जलाना, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल शामिल हैं। नवंबर में तापमान कम होने के साथ हवा की रफ्तार भी धीमी हो जाती है। ऐसे में प्रदूषण फैलाने वाले कण हवा में ऊपर नहीं जा पाते और जमीन के आसपास ही जमा रहते हैं। इसे इनवर्जन इफेक्ट कहा जाता है। इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों में धान की फसल कटने के बाद कई जगहों पर पराली जलाई जाती है। इसका धुआं हवा के साथ दिल्ली-NCR तक पहुंचता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़कर 20 से 22 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इनके अलावा, दिल्ली में चलने वाली गाड़ियों का धुआं, सड़कों की धूल, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और कचरा जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है।
जहरीली हवा से सेहत को कितना खतरा?
दिल्ली की खराब हवा का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब AQI 400 के पार पहुंच जाता है, तो हवा सभी लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए होते, इसलिए प्रदूषण का असर उन पर जल्दी पड़ सकता है। वहीं, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से परेशान लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे लोगों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और COPD जैसी बीमारियों की परेशानी बढ़ सकती है। हवा में मौजूद PM2.5 के बेहद छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इनके संपर्क में लंबे समय तक रहने से दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इन दिनों दिल्ली में कई लोग आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सिरदर्द जैसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
सरकार ने उठाए कदम, दिल्ली-NCR में GRAP-2 लागू
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण यानी GRAP-2 लागू किया है। इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
इनमें प्रमुख कदम हैं:
- सड़कों पर पानी का छिड़काव और मशीनों से सफाई बढ़ाना।
- डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियमों के अनुसार रोक लगाना।
- निर्माण स्थलों पर धूल को फैलने से रोकने के लिए सख्ती करना।
- प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों की जांच करना।
अगर प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, तो GRAP-3 या GRAP-4 के नियम भी लागू किए जा सकते हैं। इन चरणों में निर्माण कार्यों पर रोक और स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
दिल्ली की जहरीली हवा से खुद को कैसे बचाएं?
जब तक दिल्ली की हवा साफ नहीं होती, तब तक लोगों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।
- बाहर व्यायाम करने से बचें: जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो, तो सुबह-शाम बाहर टहलने या दौड़ने से बचें। घर के अंदर ही व्यायाम करें।
- N95 या N99 मास्क पहनें: बाहर निकलते समय ऐसे मास्क का इस्तेमाल करें, जो हवा में मौजूद छोटे प्रदूषण कणों को रोकने में मदद करते हैं।
- खिड़की और दरवाजे बंद रखें: जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो, तो घर में जहरीली हवा आने से रोकने की कोशिश करें।
- एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें: अगर संभव हो, तो घर के अंदर एयर प्यूरीफायर लगाएं।
- पर्याप्त पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें। हालांकि, पानी पीने से प्रदूषण के कण शरीर से बाहर नहीं निकलते।
दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए लंबे समय के उपाय जरूरी
दिल्ली में हर साल AQI का 400 के पार पहुंचना एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। यह केवल सर्दियों की समस्या नहीं, बल्कि लोगों की सेहत और पर्यावरण से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इससे निपटने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने के साथ-साथ लंबे समय की योजना पर भी काम करना होगा। पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध कराने, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और ज्यादा पेड़ लगाने जैसे उपाय जरूरी हैं। अगर सरकार और आम लोग मिलकर इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हैं, तो दिल्ली-NCR में प्रदूषण को कम करने और लोगों को साफ हवा देने की दिशा में मदद मिल सकती है।





