सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की शिकायत पहुंची मुख्यमंत्री के जनता दरबार में

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बिहार——–

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना:चाहे केन्द्र सरकार का महकमा हो या राज्य सरकारों का, भ्रष्टाचार की शिकायत लगातार मिलती रहती है। शायद ही कोई विभाग होगा जो आरोपों से बचा हो। जबकि भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा कई तरह की जांच एजेंसियों को लगाया गया है। जांच होती भी है,लोग पकड़े भी जाते हैं,उनपर कार्रवाई भी होती है। लेकिन यह तब होता है जब कोई भी व्यथित व्यक्ति इसकी लिखित शिकायत जांच एजेंसी से करता है। चाहे सीबीआई हो, सीवीसी हो,या राज्य सरकारों द्वारा गठित जांच एजेंसी हो, बिना लिखित शिकायत के वे लोग कुछ नहीं करते हैं। नतीजा यह होता है कि भ्रष्टाचारियों पर इस इक्का-दुक्का कार्रवाई से कोई असर नहीं होता है।
मिली जानकारी के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में कई लोगों ने सीएम के सामने ही बिहार सरकार के महकमों में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी। अब भला नीतीश कुमार इसे कैसे बर्दाश्त करते जिनका अवधारणा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की रही है। अपने सामने ही विभागों की पोल खुलती देख वे अफसरों पर बेहद नाराज़ हो गये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में आये लोगों ने भूमि विवाद और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों की ओर से पारित आदेश का अनुपालन न करने से संबंधित शिकायतों की फेहरिस्त देख सीएम ने अफसरों की तगड़ी क्लास लगाई। उन्होंने मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण को जनता दरबार में बुलाकर पूछा कि आपने अधीनस्थ अधिकारियों की ओर से बरती जा रही लापरवाही देखिए और उनपर कार्रवाई सुनिश्चित कीजिए।
जनता दरबार में भूमि विवाद और प्रखंड स्तर पर पदाधिकारियों की घोर लापरवाही के मामले जनता दरबार में आने से पदाधिकारियों की कलई खुलने लगी। जनता दरबार में आ रही शिकायतें अधिकतर अंचल कार्यालयोंलयों और स्थानीय पुलिस थाने के अधिकारियों की लापरवाही से संबंधित हैं। हद तो यह है कि बिहार लोक शिकायत निवारण का अधिकार अधिनियम 2015 के अधीन पदस्थापित लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों के आदेशों का पालन संबंधित अधिकारी नहीं कर रहे हैं जिस कारण लोक शिकायत निवारण का गठन अर्थहीन होता हुआ जान पड़ता है।
सीएम ने मुख्य सचिव से पूछा कि भूदान आंदोलन से संबंधित विवादों को देखने के लिए 2018 में तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था उस समिति ने आजतक कोई रिपोर्ट क्यों नहीं सबमिट किया।इसकी समीक्षा कर रिपोर्ट दें कि समिति ने अबतक क्या काम किया है और प्रगति क्या है। जनता दरबार में सीएम ने कुल 153 लोगों की शिकायतें सुनी और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनता दरबार में पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक विभाग का नाम तय रहता है जिससे संबंधित शिकायतें जनता दरबार में मुख्यमंत्री के समक्ष की जाती है। पिछले जनता दरबार में सामान्य प्रशासन विभाग,गृह, राजस्व एवं भूमि सुधार,मद्यनिषेध, आबकारी, निबंधन, सतर्कता एवं खान, भूविज्ञान मामलों से संबंधित शिकायतें सीएम के पास की जानी थी। सीएम से शिकायत करते हुए मुजफ्फरपुर के एक युवक ने कहा कि भूमि सुधार कार्यलय एवं निबंधन कार्यालय में बिना रिश्वत दिये कोई काम नहीं होता है। युवक का आरोप था कि मुजफ्फरपुर निबंधन कार्यालय में भू-अभिलेख की सच्ची-प्रतिलिपि(प्रमाणित) उपलब्ध कराने के लिए दस हजार रुपए तक की मांग रजिस्ट्रार के कर्मचारी द्वारा की जाती है।
उसने सीएम को कहा कि जब मैंने कर्मचारियों से कहा कि मैं सीएम से शिकायत करने जा रहा हूं तो उनका जवाब था कि जहां चाहे शिकायत करो उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है। इस युवक की शिकायत सुनकर सीएम ने काफी नाराजगी जताई और अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं भूमि सुधार) को आरोपों की गहराई से जांच करने का आदेश दिया।