महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल के पिता ने कहा- विजेताओं की तरह होना चाहिए स्वागत

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भारतीय महिला हॉकी टीम ने शुक्रवार को ब्रॉन्ज मेडल में मैच में ब्रिटेन से हार कर भी जीत गई। महिला टीम ने अपने खेल से उन करोड़ों भारतीयों के दिलों को जीत लिया जो 2 हफ्ते पहले तक उन्हें हारा हुआ करार दिया था। भारतीय टीम के इस प्रदर्शन की पूरे देश में चर्चा हो रही है। भारतीय हॉकी टीम ब्रॉन्ज मेडल मैच में ब्रिटेन से 3-4 से हार गई। इस हार के बाद भी पूरे देश में भारतीय महिला हॉकी टीम की जमकर तारीफ हो रही है।

हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल के पिता ने कहा, ‘पूरी दुनिया आज भारतीय महिला हॉकी टीम के खेल की प्रशंसा कर रहा है, और इस टीम का स्वागत एक विजेता टीम की तरह होना चाहिए, क्योंकि ये इसकी हकदार हैं।’ उन्होंने टीम की तारीफ करते हुए कहा, ‘इन लड़कियों ने लंबे अंतराल के बाद सेमीफाइनल में पहुंचकर नींव रखी है और कांस्य पदक मैच में उनकी हार उनके आगे की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। अब भी उनका स्वागत पूरी गर्मजोशी के साथ होना चाहिए क्योंकि ये उसकी हकदार हैं, हम हर तैयारी करेंगे ताकि उन्हें वैसा ही स्वागत दे सकें जैसा कि हीरो का होता है।’ ब्रॉन्ज मेडल मैच पर उन्होंने कहा, ‘हमें कोई अफसोस नहीं है। खेल काफी शानदार रहा और अंतिम समय तक दोनों टीमों ने कड़ी टक्कर दी। ये हार नहीं बल्कि उनके प्रयासों की जीत है।’ 

नवजोत कौर के पिता सतनाम सिंह ने भी खिलाड़ियों के जज्बे की तारीफ की है। उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से बेटियां लड़ी हैं, ये वाकई काबिले तारीफ है।’ उन्होंने आगे कहा कि ओलंपिक में हॉकी के सेमीफाइनल तक का सफर भारत की बेटियों के संघर्ष की कहानी है और इससे नए खिलाड़ियों को इसे आगे ले जाने की प्रेरणा मिलेगी। 

भारत की एक और खिलाड़ी नवनीत कौर के पिता बूटा सिंह ने भी हॉकी टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘इन लड़कियों को दिलों की विजेता माना जाना चाहिए और उन्होंने देश के किए पदक लाने के लिए सभी प्रयास किए हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत की इन बेटियों के साथ शाहाबाद में वैसा ही व्यावहार किया जाएगा जैसा मेडल जीतने के बाद किया जाता है। 

परिजनों का कहना है कि बेटियां 10 अगस्त को घर वापस आएंगी और न सिर्फ शाहाबाद या कुरुक्षेत्र पूरा हरियाणा उनके स्वागत के लिए तैयार है। खिलाड़ियों के परिजन, सुबह 7 बजे से ही मैच देखने टीवी से चिपक गए थे। रानी रामपाल के पिता ने कहा, ‘मैं दिल का मरीज हूं लेकिन फिर भी मैंने हमारी बेटियों के संघर्ष को देखकर खुद पर काबू नहीं पा सका।’ वहीं नवजोत कौर की मां मनजीत कौर मैच के अंतिम पलों में भावुक हो गई थीं। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपनी बेटी को कॉल कर उनकी तारीफ की।

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