भारत नेपाल सीमा परियोजना में भारी गड़बड़ी कैग रिपोर्ट में हुआ पर्दाफाश

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बिहार——

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना:भारत नेपाल सीमा परियोजना में गड़बड़ी का खुलासा कैग रिपोर्ट में हुआ है। विधानसभा पटल पर कैग रिपोर्ट रखे जाने से करोड़ों की राशि के नुकसान का खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं सीमा सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही बरतने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
महालेखाकार की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अति महत्वपूर्ण भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना अफसरों की भेंट चढ़ गई। दरअसल भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना का उद्देश्य सीमा बल को सीमा पर स्थित चौकियों के बीच त्वरित संपर्क स्थापित करने के साथ-साथ कार्रवाई में गतिशीलता बनाये रखने का उद्देश्य था। परन्तु दुर्भाग्यपूर्ण है कि 10 साल की अवधि बीतने के बाद भी सीमा सड़क परियोजना अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाई।
कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग का यह दावा कि भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग 91% पूरा किया जा चुका है जो बिल्कुल गलत है। बताया गया है कि 2759.25 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना था जिसमें 2497.64 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इसे कैग ने खारिज करते हुए कहा है कि अधिग्रहण वास्तव में पूरा नहीं हुआ है। क्योंकि खारिज-दाखिल की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वैधानिक रुप से स्वामित्व का हस्तांतरण नहीं किया जा सका।


पूर्वी चम्पारण जिला में भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना पूरी तरह से काल वाधित हो गई थी। भूमि अधिग्रहण के लिए आपातकालीन प्रावधान के तहत विलंब से आवेदन करने के कारण लागत में 1375.33 करोड़ की वृद्धि हो गई यानी 158% की वृद्धि हुई। इस कारण परियोजना में कम-से-कम 5 वर्षों का विलंब हुआ था। इसके अलावे भूमि के गलत वर्गीकरण के कारण 104.33 करोड़ का अधिक भुगतान हुआ। इसके अलावा दावों का सत्यापन किये बिना 45 करोड़ 36 लाख के भुगतान का मामला पाया गया था। फर्जी दस्तावेजों पर 2 करोड़ 36 लाख का भुगतान धोखाधड़ी से करने का मामला पाया गया, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा 20 करोड़ 84 लाख का स्थापना शुल्क कम प्रेशन जैसे मामले पाये गये।कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वी चम्पारण जिला के अभिलेखों की जांच में पाया गया है कि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने कानूनी प्रावधानों का उल्लघंन कर 100% मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया है। 226.81 करोड़ के वास्तविक भुगतान में से समाहर्ता द्वारा गांवों के वास्तविक सत्यापन किये बिना भू-स्वामियों को 45.36 करोड़ से अधिक राशि के भुगतान की अनुमति दी गई। कैग द्वारा 10 मामलों के नमूना जांच में पाया गया कि भू-स्वामियों को भूमि के वास्तविक मूल्य के विरुद्ध 22.51 लाख रुपए का अधिक भुगतान किया गया जिसकी वसूली लंबित है।
भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना में कई स्थानों पर बिना एलाइनमेंट तय किये ही डीपीआर तैयार कर दिया गया। कई स्थानों पर सड़क से काफी दूर चेकपोस्ट बना दिया गया जिससे चेकपोस्ट बनाने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।इस सड़क पर कुल 121 पुल का निर्माण करना है, लेकिन कुल 101 पुल का निर्माण पूरा हुआ है शेष 120 पुल मेंसे 20 पर काम चल रहा है,23 पुल ऐसे हैं जो एप्रोच सड़क से नहीं जुड़ा है जिसकारण वह किसी काम का नहीं है।कई पुल ऐसे भी हैं जो सड़क के एलाइनमेंट से एकदम अलग है।उक्त सभी बातें महालेखाकार, बिहार राम अवतार शर्मा ने महालेखाकार के मुख्य कार्यालय के सभागार में मिडिया को जानकारी दी।
पता चला है कि जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने लेखा परीक्षा प्रतिवेदन के आधार पर जांच करने की बात बताते हुए सरकार को सूचना देने की बात बताई और कहा कि सरकार के उतर की प्रतीक्षा की जा रही है।
इसका अर्थ यह है कि जिसको जहां मौका मिल रहा है बहती गंगा में हाथ धोने से जरा भी हिचकिचाहट नहीं है। कार्रवाई के नाम पर कुछ दिनों की सरगर्मी तो रहती है परन्तु बाद में सब ठंडा बस्ता में डाल दिया जाता है। क्योंकि तबतक सारी बातें लोग भूल जाते हैं।