बिहार के 40 हजार से अधिक नियोजित शिक्षकों की नौकरी खतरे में

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बिहार—

जे पी श्रीवास्तव, बिहार

पटना: बिहार के शिक्षा विभाग ने शिक्षक के पद पर नियोजन का प्रसाद बांटते हुए फरमान जारी किया था कि सर्टिफिकेट लाओ और नौकरी पाओ। सरकार के इस फरमान का सही और गलत दोनों तरह के अभ्यर्थियों ने जमकर फायदा उठाया। तकरीबन 1 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों का नियोजन शिक्षक के पद पर आनन-फानन में कर दिया गया।
बताते हैं कि इस नियोजन में बड़े पैमाने पर जाली सर्टिफिकेट के आधार पर शिक्षकों के नियोजन का आरोप लगने के कारण बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच निगरानी विभाग से कराने का निर्णय लिया। इस निर्णय के आलोक में निगरानी विभाग को यह जिम्मेवारी दी गई कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर सभी नियोजित शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच कर अपना रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप दे।
सरकार के आदेश के आलोक में निगरानी विभाग ने नियोजित शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच का कार्य शुरू कर दिया। जांच शुरू होते ही वैसे सैकड़ों की संख्या में नियोजित शिक्षकों ने नौकरी छोड़ दी जिनका सर्टिफिकेट जाली था। जांच के दौरान कुछ शिक्षकों की मृत्यु हो गई। निगरानी जांच में 40 हजार से अधिक शिक्षकों के सर्टिफिकेट की जांच नहीं हो सकी। क्योंकि उनलोगों ने अपना प्रमाण पत्र जमा नहीं कराया था। ऐसे शिक्षकों को बिहार के शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के वेबपोर्टल पर अपना-अपना सर्टिफिकेट जिसपर उनका नियोजन हुआ था उसे अपलोड करने का आदेश दिया गया था। इसके लिए 20 जुलाई आखिरी तिथि तय कर दी गई थी। बताते चलें कि इस मामले में पटना उच्च न्यायालय का भी सख्त आदेश हुआ था। सर्टिफिकेट अपलोड होने के बाद शिक्षा विभाग जांच करायेगी की सर्टिफिकेट सही है या नहीं।
इस मामले में शिक्षा विभाग ने चेतावनी भी दी थी कि तय तारीख तक सर्टिफिकेट जमा नहीं करनेवालों की नौकरी स्वत: समाप्त हो जायेगी। केवल नौकरी ही समाप्त नहीं होगी बल्कि भुगतान की गई राशि भी उन्हें लौटानी पड़ेगी। जबकि बताया यह जा रहा है कि वेबपोर्टल पर आसान नहीं है सर्टिफिकेट अपलोड करना।
अब प्रश्न यह है कि 40 हजार से अधिक शिक्षकों का सर्टिफिकेट वेबपोर्टल पर अपलोड नहीं हो सका है। बताते चलें कि शिक्षकों का नियोजन पंचायती राज और निकाय द्वारा नियोजन किया गया था। 20 जुलाई 2021 आखिरी तारीख होने के कारण वैसे शिक्षकों में बेचैनी छाई हुई है जिनका सर्टिफिकेट अपलोड नहीं हो सका है। इस मामले को लेकर शिक्षक संघ के प्रवक्ता अश्विनी पांडेय और परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने पत्र लिखकर शिक्षा विभाग से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक से 20 जुलाई की निर्धारित तिथि को आगे बढ़ाने की गुहार लगाई है तथा वेबपोर्टल की खामियों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि या तो वेबपोर्टल पर सर्टिफिकेट जमा करने की तिथि दो माह और बढ़ाई जाये या फिर ऑफलाइन सर्टिफिकेट जमा कराने का आदेश दिया जाये। आज शाम तक शिक्षा विभाग का इस मामले में क्या आदेश होता है इस पर सबकी नजर लगी हुई है।