बिहार—–
जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार
पटना: संविधान सम्मत बात है कि केन्द्र में मंत्रीमंडल गठित करने का सर्वाधिकार पीएम का और राज्यों में मुख्यमंत्रियों का होता है। वे लोग जिसे चाहें मंत्रिमंडल में शामिल करें। परन्तु वास्तविकता इसे कोसों दूर है। मंत्रिमंडल विस्तार के पहले पीएम हों या सीएम सभी अपने-अपने दलों के वरिष्ठ नेताओं, शुभचिंतकों, सहयोगी दलों से विचार-विमर्श अवश्य करते हैं, तदोपरांत निर्णय लेते हैं।
पांच राज्यों में चुनाव होने, एक-एक केन्द्रीय मंत्री पर कई कई विभागों का बोझ होने, चुनाव के मद्देनजर सभी सहयोगी पार्टियों का मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व होने को लेकर मंत्रिमंडल का विस्तार होना संभावित है और शीघ्र इसे अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
इस विस्तार को लेकर एनडीए के सहयोगी दल जदयू के नेताओं में भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर सीपी सिंह दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए अपनी बात केन्द्रीय नेताओं से कह दी है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में पीएम जो चाहेंगे वही होगा। उन्होंने इसमें जदयू की ओर से कौन शामिल होंगे कौन नहीं इसकी जानकारी से अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने सीधे तौर पर बता दिया है कि इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष आर सी पी सिंह अधिकृत हैं। वही पार्टी की बात पीएम के समक्ष रख सकते हैं।
वैसे सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कम-से-कम चार मंत्री को जदयू की ओर से शामिल होने की बात बताई जा रही है। जदयू पार्टी की ओर से यह कहा गया है कि पार्टी 2019 के फार्मूले पर कायम है जिसमें यह कहा गया है कि लोकसभा में जिसकी जितनी संख्या होगी उसी के अनुपात में उस पार्टी का प्रतिनिधित्व मंत्रिमंडल में होना चाहिए। अब देखना है कि इस मंत्रीमंडल विस्तार में जदयू को कितनी सीटें मिलती हैं।




