कन्वर्जन का खेल पिछले दो साल से चल रहा है मामला है बिहार के गया जिले का

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बिहार——-

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना: सूत्रों से जानकारी मिली है कि बिहार प्रदेश के गया जिले में पिछले दो साल से धर्मांतरण का खेल चल रहा है, परन्तु इस पर न तो सरकार का और न किसी राजनैतिक दल का ध्यान जा सका है।
बताते हैं कि गया जिले के बेलवादीह गांव में करीब 50 परिवार ने ईसाई धर्म अपना लिया जो महादलित समुदाय से आते हैं। बिहार प्रदेश के गया में धर्मांतरण का खेल पुराना है। छः साल पहले गया जिले के मानपुर प्रखंड के खंजाहांपुर गांव के 500 लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया। आश्चर्य की बात है कि जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने का आरोप लग रहा है वे भी कभी हिन्दू थे। जानकारी मिल रही है कि पिछले दो साल में आधा दर्जन गांवों में धर्मांतरण हुआ है। यह कहना है पूर्व सांसद रामजी मांझी का।
गया जिले के जिन गांवों में पिछले दो साल में धर्मांतरण के मामले हुये हैं उन गांवों का नाम है,टेकारी के केवड़ा, मुफस्सिल के दोहारी,अतरी के टेकरा, बोधगया के अतिया और गया सदर के रामसागर टैंक इलाके के दर्जनों परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है। अलग-अलग गांवों में अलग अलग धर्म परिवर्तन के कई कारण बताये जाते हैं। कुछ तो अंधविश्वास,कुछ गरीबी,और कुछ बेहतर जीवन जीने की महात्वाकांक्षा रही है।
बताया जाता है कि गया में डोभी से लेकर बाराचट्टी तक के गांवों में दर्जनों परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है। हालांकि कुछ परिवार ऐसे हैं जो वापस हिन्दू धर्म में आ गये हैं। दलितों को धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक रूप तैयार करने वाले लोग ज्यादातर बाहर के होते हैं,हां अपवाद स्वरूप कुछ गांव के लोग भी होते हैं। वैसे जानकारी यह भी मिल रही है कि धर्म परिवर्तन कराने के लिए कुछ लोगों को सैलरी देकर गांवों में तैनात किया जाता है जिनका काम लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक रुप से तैयार करना होता है। दरअसल होता यह है कि धर्म परिवर्तन किये किंचित लोगों को आर्थिक सहायता देकर उनकी माली हालत में सुधार किया जाता है जिसका प्रभाव गांव के अन्य लोगों पर पड़ता है। वे धर्म परिवर्तन कराये लोगों के प्रभाव में आकर खुद भी अपना धर्म परिवर्तन कर लेते हैं या फिर धर्म परिवर्तन कराये लोगों की आर्थिक स्थिति को देखकर भी धर्म परिवर्तन करा लेते हैं।
भारतवर्ष में धर्म की आजादी है, कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है। परन्तु हमारा संविधान किसी को प्रलोभन देकर,धर्म परिवर्तन के लिए गलत ढंग से उत्प्रेरित कर, जोर-जबरदस्ती कर, बहकावे में लाकर धर्म परिवर्तन कराता है तो यह अपराध की श्रेणी में आता है,और ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई किये जाने का प्रावधान है।
विहिप के दक्षिण बिहार के शाखा पदाधिकारी महेश प्रसाद सिन्हा बताते हैं कि सारा काम एक दिन में नहीं होता है।इसके लिए धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्थाएं सालों से लगी रहती हैं।
धर्मांतरण पर भाजपा की ओर से चुप्पी लगा ली गई है। 13 जुलाई को धर्मांतरण की घटना बेलवादीह गांव में घटित हुई है लेकिन अभी तक उनका कोई नेता उस गांव में नहीं गया है। भाजपा,राजद, जदयू किसी के तरफ से इस घटना पर कार्रवाई की बात नहीं की गई है। यह आश्चर्यजनक है।