एफआईआर दर्ज कराने के लिए घंटों बैठना पड़ा एक आईएएस अधिकारी को

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बिहार—-

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना: प्राप्त सूचनानुसार बिहार के आईएएस ऑफिसर को 4 घंटे से अधिक बैठना पड़ा पटना के गर्दनीबाग थाने में। उक्त आईएएस ऑफिसर ने सुशासन की सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि जब एक आईएएस ऑफिसर को घंटो एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने में इंतजार करना पड़े तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा इसे सहज समझा जा सकता है।
कहते हैं कि एक आईएएस अधिकारी जो पहले बिहार कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कई सचिव स्तर के अधिकारी तथा पुलिस के वरीय अधिकारी के विरुद्ध एससी/एसटी थाना गर्दनीबाग में एफआईआर दर्ज कराने बिहार के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दो सेट में एफआईआर की कॉपी लेकर थाने पहुंचे। थानेदार ने जब एफआईआर को देखा तो वह एफआईआर लिए बाहर निकल गया। एफआईआर दर्ज कराने वाले आईएएस बिहार कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन, गृहविभाग के प्रधान सचिव सहित कई पदों पर रह चुके हैं। वर्तमान में वह सामान्य प्रशासन विभाग में मुख्य जांच आयुक्त के पद पर नियुक्त हैं। 31 मार्च 2022 में वे सेवानिवृत्त होंगे।
बताते हैं कि सुधीर कुमार जब बिहार कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन थे तब 2014 में इंटरस्तरीय संयुक्त परीक्षा का पेपर लीक हुआ था, जिसमें उन्हें दोषी पाया गया था।इस मामले की जांच बिहार सरकार द्वारा कराई गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें 2017 में निलंबित करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था। लगभग तीन वर्ष तक वे जेल में रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें रिहा किया गया था।
प्राथमिकी दर्ज कराने जब थाने पहुंचे तो वहां उनसे पूछा गया कि किसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराना है। उन्होंने बताया कि एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने दीजिए फिर पता चल जाएगा कि किनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुआ है। बहुत पूछने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और पटना के तत्कालीन एसएसपी मनु महाराज सहित अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाने की बात बताई।अन्य नामों का खुलासा उन्होंने नहीं किया।
इस हाईप्रोफाइल एफआईआर को देखते ही गर्दनीबाग के एसएचओ अरुण कुमार एफआईआर को लेकर बाहर चले गये और लगभग चार घंटे तक उन्हें थाने में इंतजार करना पड़ा। बाहर से लौटने के बाद थानाध्यक्ष ने केवल पावती उन्हें दी परन्त एफआईआर दर्ज नहीं की। उन्होंने बताया कि मार्च में भी जब वे शास्त्री नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने गये थे तो ऐसा ही हुआ था। वहां भी एफआईआर दर्ज नहीं हुआ।
अब भला विपक्ष इस मुद्दे को कैसे छोड़ सकता था। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को लेकर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में कोई भी किसी के उपर एफआईआर दर्ज कराता है तो पुलिस प्रत्येक बिन्दु पर जांच करती है। शिकायत की गई बातों में सच्चाई पाये जाने पर आगे की कार्रवाई होती है अन्यथा एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर केस को समाप्त करने की अनुशंसा करती है। कभी-कभी गलत एफआईआर दर्ज करने को लेकर पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने वाले के विरुद्ध कार्रवाई भी करती है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है इस पर सबकी नजर लगी रहेगी। वैसे पता चला है कि थानाध्यक्ष ने एफआईआर का पेपर मिलने की बात स्वीकारते हुए कहा कि पावती दे दी गई है। सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।