केंद्रीय बजट पर सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल की प्रतिक्रिया

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लखनऊ | सामाजिक उद्योग व्यापार मण्डल के प्रदेश अध्यक्ष रामबाबू रस्तोगी ने केंद्रीय बजट पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए इसे व्यापारियों, किसानों और उद्यमियों के लिए ‘उम्मीदों के विपरीत’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद इस बजट में मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की मुख्य समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है।

बजट की मुख्य कमियां और आपत्तियां:

ईंधन और GST: डीजल, पेट्रोल और एलपीजी गैस को एक बार फिर GST के दायरे से बाहर रखकर सरकार ने आम जनता और व्यापारियों की लागत कम करने का मौका खो दिया है।

इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (13% का फंसा पैसा): उद्योगपति कच्चे माल (Raw Material) पर 18% GST दे रहे हैं, जबकि तैयार उत्पाद पर मात्र 5% GST लग रहा है। रस्तोगी जी ने मांग की कि पोर्टल पर जमा इस 13% अतिरिक्त राशि के तत्काल भुगतान का प्रावधान होना चाहिए, ताकि उद्यमियों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) व्यापार में घूम सके, न कि पोर्टल पर फंसी रहे।

छोटे व्यापारियों की अनदेखी: छोटे व्यापारियों को लोन के लिए आज भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ी राहत न मिलने से मध्यम वर्ग ठगा महसूस कर रहा है।

निवेशकों पर बोझ: STT (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) में वृद्धि से शेयर और डेरिवेटिव ट्रेडिंग छोटे निवेशकों के लिए महंगी हो गई है।

निर्यात में बाधाएं: निर्यातकों के लिए कच्चे माल पर शुल्क और लॉजिस्टिक लागत कम करने के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद पिछड़ सकते हैं।

“व्यापारियों और इंडस्ट्री समूहों के कस्टम विवाद, लाइसेंसिंग और टैक्स न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की सख्त जरूरत थी, जिसे इस बजट में गंभीरता से नहीं लिया गया। सरकार को व्यापारियों के पोर्टल पर जमा पैसे को रिफंड करने की ठोस नीति बनानी चाहिए।”

— रामबाबू रस्तोगी, प्रदेश अध्यक्ष