मार्गशीर्ष अमावस्या पर भक्तों ने लगाई गोरखगिरि परिक्रमा 

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गोरखगिरि पर्वत में हो रही पेड़ों की अवैध कटान रुकवाने की प्रशासन से मांग

 

जनपद महोबा बुंदेलखंड से ब्यूरो चीफ राम कुमार की रिपोर्ट

 

महोबा। मार्गशीर्ष अमावस्या पर आज सुबह श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक चेतना के केन्द्र गोरखगिरि पर्वत की पांच किलोमीटर लंबी परिक्रमा लगाई और जिला प्रशासन से पर्वत के ऊपर मौजूद दुर्लभ औषधीय पेड़ पौधों को अवैध कटान से बचाने की मांग की। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा प्राचीन शिवतांडव मंदिर से प्रारंभ की फिर पर्वत के चारों तरफ विराजमान सभी देवी-देवताओं को नमन किया।

परिक्रमा संपन्न होने के बाद बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर बुंदेलखंडी ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ गोरखगिरि पर्वत पर मौजूद पेड़-पौधों की अवैध कटान अचानक बढ़ गई है। दुर्लभ औषधीय पौधों को लोग जलाए लकड़ी समझ कर काट रहे हैं जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। दो साल पहले लखनऊ के राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान से वैज्ञानिकों की एक टीम इन पेड़-पौधों की पहचान और सर्वे करने आई थी। पहले यहां 114 प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों की पहचान हुई थी। अब उनका अस्तित्व संकट में है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष चित्रकूट क्षेत्र से कुछ व्यापारी यहां आए और बड़े पैमाने पर डायबिटीज की दवा गुणमार के पौधे जड़ से काट कर ले गए। जब 112 डायल कर पुलिस को बुलाया तब जाकर वे भागे। रतनजोत, अश्वगंधा व मूसली वगैरा पहले ही यहां से गायब हो चुके हैं। गोरखगिरि पर्वत न केवल गुरू गोरखनाथ की तपोभूमि है बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। गोरखगिरि पर्वत को आदर्श पर्यटन तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। क्षेत्र में इसको चित्रकूट के कामदगिरि के समकक्ष माना जाता है। परिक्रमा में दिलीप जैन, डा. देवेन्द्र, नीरज पुरवार, अशोक बाजपेई, मनीष जैदका, गया प्रसाद, महेन्द्र, प्रेम, प्रवीण चौरसिया, सिद्धे सेन, महेन्द्र सोनी, अवधेश गुप्ता, धन्नू, चंद्रभान, नरेन्द्र, रमा व उमा चौरसिया आदि मौजूद रहे।