राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर विशेष अंकुर

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बिहार—–

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना: भारतवर्ष में 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाने की परम्परा 1991 से चली आ रही है। देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर विधानचंद्र राॅय का जन्मदिन और पुण्य तिथि इसी दिन होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
नेशनल डाॅक्टर डे सर्वप्रथम भारत सरकार ने 1991 में मनाया था। डॉक्टर विधानचंद्र राॅय को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इससे बेहतर बात और क्या हो सकती है। डॉक्टर विधानचंद्र राॅय का जन्म 1 जुलाई 1882 को पटना में हुआ था और 80 वर्ष के बाद इसी दिन इनकी मृत्यु हो गई। यह एक विरल संयोग था कि एक ही तिथि को जन्म और मृत्यु हुई।
राष्ट्रीय डाॅक्ट्रर्स डे पर कोविड-19 महामारी के समय डाॅक्टरों के सेवा भाव, रोगियों के प्रति निरंतर चिंतन, बीमारी से लड़ने की सतत प्रेरणा देने, संक्रमण की बहुत परवाह किए बिना उनकी चिकित्सा में लगे रहने, यहां तक कि सैकड़ों हजारों की संख्या में अपनी जान तक गंवा देने वाले चिकित्सकों को हमने देखा है। देश ने कई लब्धप्रतिष्ठित, जाने-माने चिकित्सकों को खोया है, जिसकी भरपाई आनेवाले दिनों में असंभव है। ऐसे में आज के दिन उन्हें याद करना,उनके प्रति सम्मान प्रकट करना, दिवंगत डॉक्टरों के परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट करना हमरी नैतिक जिम्मेवारी बनती है।
कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को जिसतरह अपने चपेटे में ले रखा है उससे निजात दिलाने में आधुनिक चिकित्सा, आधुनिक चिकित्सक, चिकित्सा कर्मियों के सतत प्रयास, निष्ठा पूर्ण सेवा ही कारगर साबित हो रही है।
डॉक्टर्स डे अलग-अलग देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है। इसलिए इस दिन को मनाने का इतिहास भी हर देश का अलग-अलग है। यहां हम भारत में डाॅक्टर्स डे से जुड़े इतिहास बारे में चर्चा कर रहे हैं। दुनिया में डाॅक्टर्स को बहुत सम्मान दिया जाता है। परन्तु भारत में तो उन्हें पूजा तक जाता है। यहां के लोग डाॅक्टरों को भगवान का दूसरा रुप समझते हैं। ऐसा इसलिए है कि आज भी भारतवर्ष में अधिक संख्या में लोग बीमार पड़ते हैं। इसमें साधारण से लेकर गंभीर बीमारियां शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा कारण शुद्ध पेयजल, शुद्ध भोजन, शुद्ध जलवायु का अभाव सहित कुपोषण भी एक कारण है।
बीमार पड़ने पर निरोग होने के लिए उनका एकमात्र सहारा आधुनिक चिकित्सक होते हैं।उनकी चिकित्सा से ठीक होकर वे दिल से उन्हें दुआएं देते हैं और उन्हें भगवान का ही एक रुप समझते हैं। ऐसा केवल भारतवर्ष में ही होता है। इसलिए उनका दर्जा समाज में बहुत ऊंचा होता है।
डॉक्टर के समर्पण, कार्य के प्रति निष्ठा, ईमानदारी,लगन को सम्मान देने के लिए आज के दिन जश्न मनाया जाता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि केन्द्र सरकार, राज्य सरकारें, सामाजिक संगठनों, जागरूक और प्रबुद्ध नागरिकों, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब पोर्टल मीडिया द्वारा इस तिथि को जागरुकता अभियान चलाकर डाॅक्टरों की सेवा भावना से आमजनों को परिचित कराया जाये, उन्हें सम्मान देने के लिए जनता को जागरूक किया जाये। यही इस “राष्ट्रीय डाॅक्टर्स डे” दिवस को मनाने का सार्थक कदम होगा।

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