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जाति की सियासत ने चिराग को नीतीश कुमार के सुर में सुर मिलाने के लिए मजबूर किया

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बिहार———

जे.पी.श्रीवास्तव, बिहार

पटना: राजनीति कब किसे अपना बना दे और कब पराया यह समझना और जानना काफी कठिन काम है। कल के धुर विरोधी आज के मित्र बन सकते हैं। बिहार की राजनीति में आजकल बड़ा दांव पेंच चल रहा है। सभी राजनेता अपना-अपना बयान नीतीश कुमार को केन्द्र में रखकर दे रहे हैं।
एक तरफ लालू यादव नीतीश को अपने दिल में बता रहे हैं तो दूसरी ओर चिराग पासवान का सुर भी नीतीश कुमार के प्रति बदला हुआ नजर आ रहा है। दरअसल बिहार में जातीय जनगणना की मांग जोर पकड़ रही है। राजद, जदयू,हम के साथ चिराग पासवान भी जातीय जनगणना की मांग पर एकमत नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि क्या बिहार की राजनीति में फेरबदल होने वाला है।
चिराग पासवान ने वैशाली में जो बयान दिया है जिससे बिहार की राजनीति में उलटफेर का संकेत माना जा रहा है। बताते हैं कि अपनी आशीर्वाद यात्रा के क्रम में चिराग वैशाली जिला में थे।जिन मुद्दों पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव बीजेपी सरकार पर दबाव बना रहे हैं उस पर चिराग पासवान भी नीतीश कुमार के समर्थन में खुलकर सामने आ गये हैं।
सोचने वाली बात यह है कि जिस नीतीश कुमार के खिलाफ 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने खुलकर विरोध किया,अपनी पार्टी एलजेपी में टूट का जिम्मेदार ठहराया अब ऐसी कौन-सी बात हो गई जो चिराग पासवान नीतीश कुमार का समर्थन करने लगे हैं। दरअसल यह सब तब हुआ जब चिराग पासवान से जातीय जनगणना को लेकर मिडिया ने सवाल पूछा कि जातीय जनगणना के संबंध में नीतीश कुमार की राय से आप सहमत हैं,अब इस पर चिराग पासवान को तो पक्षधर होना ही था।
चिराग पासवान ने कहा कि मैं जातीय आधार पर जनगणना से सहमत हूं। केन्द्रीय स्तर पर या राज्य स्तर पर बननेवाली बहुत सी ऐसी योजनाएं है जो जातीयता के आधार पर बनाई जाती है। ऐसी स्थिति में सही राशि के आवंटन के लिए यह जरूरी है कि जातीय आंकड़े आपके पास उपलब्ध हो। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी की याद दिलाते हुए कहा कि आपके पास आंकड़े होने चाहिए।उनका कहना था कि 1931 में आखिरी बार यह जनगणना हुई थी। एक लम्बी अवधि बीत चुकी है, इसलिए जरूरी है कि जातीय जनगणना हो।
इधर लालू प्रसाद ने भी एक बड़ा बयान दिया है जिससे बिहार के सियासत में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। उनका बयान सीधे नीतीश कुमार से जुड़ा है। लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार तो उनके दिल में बसते हैं। रिश्ते तो बनते बिगड़ते रहते हैं। हमलोग साथ में हैं। यह बयान उन्होंने नीतीश कुमार के उस बयान के बाद दिया है जिसमें नीतीश कुमार ने पेगासस जासूसी कांड की जांच की मांग का समर्थन किया है।
इस बयान का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि लालू प्रसाद यादव के बेटे और बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने 30 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उनसे जातीय जनगणना की मांग के लिए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से समय मांगने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अख्तियार करते हुए नीतीश कुमार ने इसे स्वीकार कर लिया। इतना ही नहीं उनकी पार्टी जदयू ने दिल्ली में अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जाति जनगणना के पक्ष में और जन्म नियंत्रण के लिए किसी भी कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।
प्राप्त सूचनानुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातीय जनगणना कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के लिए समय देने संबंधी पत्र भी भेज दिया है।
अब देखना है कि इस मिलन का दूरगामी राजनीतिक परिणाम क्या होता है।